विदेशों में भारतीय श्रमिकों की हालत चिंताजनक: हर दिन 20 से ज्यादा मौतें, खाड़ी देशों से सबसे ज्यादा शिकायतें

विदेश मंत्रालय की ओर से राज्यसभा में पेश आंकड़ों ने विदेशों में काम कर रहे भारतीय श्रमिकों की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक साल 2021 से 2025 के बीच 37,740 भारतीय श्रमिकों की विदेशों में मौत हुई, यानी औसतन हर दिन 20 से ज्यादा भारतीयों ने विदेशी धरती पर जान गंवाई। सबसे ज्यादा मौतें खाड़ी देशों में दर्ज की गई हैं।
आंकड़ों के अनुसार 2021 में 8,234, 2022 में 6,614, 2023 में 7,291, 2024 में 7,747 और 2025 में 7,854 श्रमिकों की मौत हुई। इनमें से 86 प्रतिशत से अधिक मामले यूएई, सऊदी अरब, कुवैत, ओमान और कतर जैसे खाड़ी देशों से जुड़े हैं। अकेले यूएई में 12,380 और सऊदी अरब में 11,757 मौतें दर्ज की गईं, जिसने सबसे ज्यादा चिंता बढ़ाई है।
सिर्फ मौतें ही नहीं, बल्कि शोषण और दुर्व्यवहार के मामले भी तेजी से बढ़े हैं। विदेशों में भारतीय मिशनों को पिछले पांच वर्षों में 80,985 शिकायतें मिलीं। इनमें सबसे ज्यादा शिकायतें यूएई (16,965), कुवैत (15,234), ओमान (13,295) और सऊदी अरब (12,988) से आईं। शिकायतों में वेतन न मिलना, पासपोर्ट जब्त करना, छुट्टी न देना, ओवरटाइम का भुगतान न करना और एग्जिट वीजा रोकना जैसी समस्याएं प्रमुख हैं।
सरकार ने कहा है कि विदेशों में भारतीयों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी भी संकट की सूचना मिलते ही भारतीय दूतावास स्थानीय प्रशासन, श्रम विभाग और पुलिस से संपर्क करते हैं। साथ ही कानूनी सहायता और द्विपक्षीय श्रम समझौतों के जरिए श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा की जा रही है।



