उत्तराखंड

गोशाला बनी ऊर्जा का केंद्र, गोबर गैस से बिजली और ईंधन तैयार कर रहा रुड़की का गांव

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महंगाई और बढ़ती एलपीजी कीमतों के बीच हरिद्वार जिले के रुड़की क्षेत्र का एक गांव आत्मनिर्भरता की मिसाल बनकर सामने आया है। यहां ग्राम प्रधान स्वामी घनश्याम ने ऐसी आधुनिक गोशाला का मॉडल तैयार किया है, जहां गोबर से गैस और ऊर्जा का उत्पादन किया जा रहा है। इस पहल के बाद गांव में एलपीजी पर निर्भरता काफी हद तक कम हो गई है।

ग्राम प्रधान स्वामी घनश्याम की पहल से गोशाला को ऊर्जा केंद्र के रूप में विकसित किया गया है। गोबर गैस प्लांट के जरिए निकलने वाली गैस का उपयोग खाना बनाने और अन्य घरेलू जरूरतों के लिए किया जा रहा है। इससे ग्रामीणों को आर्थिक राहत मिलने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिल रही है।

बताया जा रहा है कि इस मॉडल को देखने के लिए आसपास के गांवों से भी लोग पहुंच रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इससे न केवल ईंधन की बचत हो रही है, बल्कि गोबर का सही उपयोग होने से स्वच्छता भी बढ़ी है। गांव में इस पहल को आत्मनिर्भर भारत अभियान की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि इस तरह के मॉडल को अन्य गांवों में भी अपनाया जाए तो ग्रामीण क्षेत्रों में ऊर्जा संकट को काफी हद तक कम किया जा सकता है। साथ ही जैविक खेती और स्वच्छ ऊर्जा को भी बढ़ावा मिलेगा।

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