उत्तराखंड के जंगलों में बाघ और तेंदुओं की सुरक्षा पर सवाल: तीन साल में 345 मौतें, बढ़ी चिंता

उत्तराखंड के वन्यजीव संरक्षण को लेकर चिंताजनक आंकड़े सामने आए हैं। ताजा रिपोर्ट के अनुसार राज्य के जंगलों में पिछले तीन वर्षों में बाघ और तेंदुओं की कुल 345 मौतें दर्ज की गई हैं, जिससे वन विभाग और पर्यावरण विशेषज्ञों की चिंता बढ़ गई है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि लगातार हो रही इन मौतों के पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं, जिनमें आपसी संघर्ष, सड़क हादसे, प्राकृतिक कारण और मानव-वन्यजीव संघर्ष प्रमुख हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जंगलों में बढ़ता दबाव और घटता प्राकृतिक आवास इन घटनाओं की बड़ी वजह है।
आंकड़ों के मुताबिक, उत्तराखंड में तेंदुओं की मौतों का आंकड़ा बाघों की तुलना में काफी अधिक है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि राज्य में मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है।
वन विभाग ने इन मामलों को गंभीरता से लेते हुए निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की बात कही है। साथ ही प्रभावित क्षेत्रों में गश्त बढ़ाने और स्थानीय लोगों को जागरूक करने के प्रयास भी किए जा रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में यह समस्या और अधिक विकराल रूप ले सकती है।



