संसद में सरकार का दावा: इथेनॉल ब्लेंडिंग नहीं होती तो पेट्रोल 125 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच जाता

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने संसद में इथेनॉल मिश्रित ईंधन (E20) कार्यक्रम का बचाव करते हुए दावा किया है कि यदि पेट्रोल में इथेनॉल की ब्लेंडिंग नहीं की गई होती, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के दौरान देश में पेट्रोल की कीमत करीब 125 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच सकती थी। सरकार का कहना है कि इथेनॉल ब्लेंडिंग ने आम उपभोक्ताओं को महंगे ईंधन से राहत दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की ओर से संसद में दिए गए जवाब में बताया गया कि जब वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमत लगभग 135 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी, तब इथेनॉल मिश्रण और अन्य सरकारी उपायों के कारण पेट्रोल की कीमतों को नियंत्रित रखा जा सका। सरकार ने कहा कि तेल विपणन कंपनियां अपेक्षाकृत कम लागत पर इथेनॉल खरीद सकीं, जिससे उपभोक्ताओं पर बोझ कम पड़ा।
सरकार ने E20 ईंधन को लेकर उठ रही चिंताओं का भी जवाब दिया। मंत्रालय ने कहा कि व्यापक परीक्षणों और वास्तविक उपयोग के दौरान E20 से इंजन को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचने का कोई प्रमाण नहीं मिला है। सरकार के अनुसार, पुराने वाहनों में ईंधन दक्षता पर सीमित प्रभाव पड़ सकता है, लेकिन व्यापक स्तर पर इंजन फेल होने जैसी शिकायतें सामने नहीं आई हैं।
सरकार का यह भी कहना है कि इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम से कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम हुई है, विदेशी मुद्रा की बचत हुई है और किसानों को भी लाभ मिला है। साथ ही, यह पहल कार्बन उत्सर्जन कम करने और स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।



