
नई दिल्ली। अडानी एंटरप्राइजेज की रक्षा इकाई पर गंभीर टैक्स चोरी के आरोप लगे हैं। राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) ने लगभग 9 मिलियन डॉलर (करीब ₹77 करोड़) की कथित टैक्स चोरी के सिलसिले में अडानी डिफेंस सिस्टम एंड टेक्नोलॉजी की जांच शुरू कर दी है। सूत्रों के अनुसार, इस कंपनी पर आरोप है कि उसने कुछ मिसाइल कलपुर्जों के आयात में गलत वर्गीकरण करके सीमा शुल्क और टैक्स से बचने का प्रयास किया। मार्च में शुरू हुई जांच में पता चला कि कंपनी ने शॉर्ट-रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल सिस्टम के लिए उपयोग होने वाले पार्ट्स को लॉन्ग-रेंज मिसाइल पार्ट्स के रूप में वर्गीकृत किया, जिससे उन्हें टैक्स-मुक्त श्रेणी में रखा जा सका।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस प्रकार के मामले में कंपनियों पर कथित टैक्स चोरी की राशि के बराबर जुर्माना लगाया जा सकता है, जो इस मामले में लगभग 18 मिलियन डॉलर तक पहुँच सकता है। जांच के दौरान अडानी के अधिकारियों ने कुछ आयातित पुर्जों के गलत वर्गीकरण को स्वीकार किया है, लेकिन उन्होंने विस्तार से जानकारी साझा नहीं की।
यह मामला अडानी समूह की उस इकाई से जुड़ा है जो मिसाइल, ड्रोन और अन्य रक्षा उपकरण का निर्माण करती है। सरकार की जांच जारी है और इस मामले में आगे की कार्रवाई पर सबकी नजरें लगी हुई हैं।



