कूनो में फिर हादसा: जंगल में छोड़े गए 10 माह के चीते के शावक की मौत, कारण पोस्टमॉर्टम के बाद साफ होगा

कूनो नेशनल पार्क (मध्य प्रदेश) से एक और दुखद खबर सामने आई है। जंगल में छोड़े गए दक्षिण अफ्रीकी चीता वीरा के दो शावकों में से एक की शुक्रवार को मौत हो गई। यह वही चीते थे जिन्हें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अंतरराष्ट्रीय चीता दिवस के अवसर पर गुरुवार को बाड़े से जंगल में छोड़ा था।
शावक, जिसकी उम्र करीब 10 महीने बताई गई है, गुरुवार रात अपनी मां वीरा और अपने दूसरे भाई-बहन से अलग हो गया था। शुक्रवार को जंगल में उसकी लाश मिली।
चीता प्रोजेक्ट के फील्ड डायरेक्टर के अनुसार, मौत का कारण अभी स्पष्ट नहीं है और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बाद ही सही वजह पता चलेगी। उन्होंने यह भी बताया कि वीरा और दूसरा शावक सुरक्षित हैं और सामान्य व्यवहार कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री द्वारा जंगल में छोड़ी गई 6 वर्षीय वीरा और उसके दोनों शावक (जन्म: फरवरी 2025) कूनो पार्क के पारोंड वन क्षेत्र में मुक्त रूप से जीवन शुरू करने वाले थे, लेकिन एक दिन बाद ही यह हादसा हो गया।
इस घटना के बाद कूनो में अब 28 चीते बचे हैं—जिनमें से 8 नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से आए वयस्क चीते तथा 20 भारत में जन्मे शावक शामिल हैं। इनमें से 18 चीते पूरी तरह जंगल में शिकार कर रहे हैं, जबकि 10 अभी भी सुरक्षित बाड़ों में हैं।
गौरतलब है कि यह पिछले तीन महीनों में दूसरा भारत-जन्मा चीता शावक है जिसकी मौत हुई है। इससे पहले सितंबर में नामीबियाई मादा चीता ज्वाला की 20 महीने की बेटी की मौत जंगल में एक तेंदुए के हमले में हो गई थी।
लगातार हो रही इन मौतों ने कूनो में चीतों के दीर्घकालिक संरक्षण को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।



