उत्तराखंड हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: दूसरे राज्यों से विवाह कर आई SC महिलाओं को नहीं मिलेगा आरक्षण लाभ

उत्तराखंड हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट कर दिया है कि दूसरे राज्यों की अनुसूचित जाति की महिलाएँ, जो शादी के बाद उत्तराखंड में आकर बस गई हैं, उन्हें राज्य सरकार की नौकरियों में SC आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा।
यह फैसला जस्टिस मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ ने 32 याचिकाओं पर सुनवाई के बाद दिया। ज्यादातर याचिकाएँ उन महिलाओं की थीं जो मूल रूप से उत्तर प्रदेश या अन्य राज्यों की निवासी थीं और विवाह के बाद उत्तराखंड में रहने लगी थीं।
याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि पति उत्तराखंड के अनुसूचित जाति समुदाय से है, इसलिए उन्हें भी यहां की SC श्रेणी में शामिल किया जाए। लेकिन विभाग ने इनका दावा खारिज कर दिया, जिसे चुनौती हाई कोर्ट में दी गई।
अदालत ने कहा कि—
>जाति का दर्जा जन्म से तय होता है, विवाह से नहीं।
>संविधान के अनुच्छेद 341 व 342 के अनुसार SC/ST सूची राज्य-विशिष्ट होती है।
>एक राज्य के SC को दूसरे राज्य में स्वतः SC का दर्जा नहीं मिल सकता।
>प्रवासियों को आरक्षण देने से संबंधित राज्य के मूल SC वर्ग के अधिकारों का उल्लंघन होगा।
कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि:
किसी भी कारण से दूसरे राज्य में बस जाने पर व्यक्ति उस राज्य में आरक्षण का हकदार नहीं होगा और सामान्य वर्ग माना जाएगा।
अंत में कोर्ट ने सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया और राज्य सरकार के निर्णय को सही ठहराया।



