उत्तराखंड

विधानसभा में पेश होगा 1.11 लाख करोड़ रुपए का बजट

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कैबिनेट बैठक में 28 प्रस्तावों पर मुहर, महिला पोषण, शिक्षा और शहरी विकास पर विशेष फोकस

देहरादून। उत्तराखंड सरकार वित्तीय वर्ष 2026–27 के लिए 1.11 लाख करोड़ रुपए का बजट विधानसभा में पेश करने जा रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में इस बजट प्रस्ताव सहित कुल 28 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। सरकार का दावा है कि यह बजट राज्य के समग्र विकास, बुनियादी ढांचे के विस्तार, सामाजिक सुरक्षा और युवाओं के लिए रोजगार सृजन पर केंद्रित होगा।

सूत्रों के अनुसार, आगामी बजट पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में लगभग 10 प्रतिशत अधिक होगा। राज्य सरकार ने संकेत दिए हैं कि इस बार पूंजीगत व्यय में वृद्धि की जाएगी, ताकि सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और शहरी विकास परियोजनाओं को गति मिल सके।

मुख्यमंत्री महिला पोषण योजना में अहम संशोधन

कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री बाल पोषण अभियान के तहत संचालित योजनाओं में महत्वपूर्ण संशोधन को मंजूरी दी गई। 3 से 6 वर्ष की आयु के बच्चों को दिए जाने वाले पोषण आहार में अब अतिरिक्त पौष्टिक सामग्री शामिल की जाएगी। सरकार ने अंडा, दूध और अन्य उच्च प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों को योजना में शामिल करने का निर्णय लिया है।

राज्य सरकार का मानना है कि कुपोषण की समस्या से निपटने के लिए पोषण योजनाओं को और प्रभावी बनाना जरूरी है। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रारंभिक आयु में बेहतर पोषण मिलने से बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

इसके अलावा गर्भवती और धात्री महिलाओं के लिए भी पोषण संबंधी प्रावधानों को मजबूत करने पर चर्चा हुई। सरकार जल्द ही इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर सकती है।

शिक्षा क्षेत्र को बढ़ावा

कैबिनेट ने उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत 21 अशासकीय अनुदानित महाविद्यालयों को नियमित अनुदान सूची में शामिल करने को मंजूरी दी है। इससे इन संस्थानों को वित्तीय स्थिरता मिलेगी और शैक्षणिक संसाधनों में सुधार होगा।

सरकार का उद्देश्य राज्य में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाना और छात्रों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है। साथ ही, शिक्षकों और कर्मचारियों से जुड़े कुछ प्रशासनिक प्रस्तावों को भी स्वीकृति प्रदान की गई है।

शिक्षा क्षेत्र में डिजिटल संसाधनों के विस्तार, स्मार्ट क्लासरूम और शोध गतिविधियों को बढ़ावा देने पर भी सरकार विशेष ध्यान दे रही है।

नगर निकायों में नए पद सृजन

राज्य के 11 नगर निगमों में पर्यावरण अभियंताओं के नए पद सृजित किए जाएंगे। तेजी से बढ़ते शहरीकरण और पर्यावरणीय चुनौतियों को देखते हुए यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

नगर निकायों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, सीवरेज प्रणाली और हरित क्षेत्रों के संरक्षण को मजबूत करने के लिए तकनीकी विशेषज्ञों की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। नए पद सृजित होने से शहरी व्यवस्थाओं में सुधार की उम्मीद है।

लोक सेवा आयोग की रिपोर्ट को मंजूरी

कैबिनेट ने उत्तराखंड लोक सेवा आयोग की वार्षिक रिपोर्ट को विधानसभा के पटल पर रखने की अनुमति दी है। यह रिपोर्ट राज्य में विभिन्न विभागों में की गई भर्तियों और चयन प्रक्रियाओं की जानकारी देती है।

सरकार का कहना है कि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए आयोग की रिपोर्ट को सदन में प्रस्तुत किया जाना आवश्यक है।

स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा पर जोर

हालांकि बैठक में स्वास्थ्य से जुड़े विस्तृत प्रस्तावों की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई, लेकिन संकेत मिले हैं कि आगामी बजट में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। जिला अस्पतालों के सुदृढ़ीकरण, मेडिकल उपकरणों की खरीद और डॉक्टरों की नियुक्ति के लिए अतिरिक्त बजट आवंटित किया जा सकता है।

सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के तहत वृद्धावस्था पेंशन, दिव्यांग सहायता और विधवा पेंशन योजनाओं के दायरे को भी विस्तार देने की संभावना है।

बुनियादी ढांचा और रोजगार

सरकार ने स्पष्ट किया है कि राज्य के पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों में संतुलित विकास सुनिश्चित करना उसकी प्राथमिकता है। सड़क निर्माण, पुलों के निर्माण और ग्रामीण संपर्क मार्गों के विस्तार के लिए पूंजीगत निवेश बढ़ाया जाएगा।

इसके साथ ही पर्यटन क्षेत्र को प्रोत्साहन देने के लिए नई परियोजनाएं शुरू करने की योजना है। सरकार का मानना है कि पर्यटन, स्वरोजगार और स्टार्टअप को बढ़ावा देकर युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं।

वित्तीय अनुशासन पर जोर

राज्य सरकार ने बजट तैयार करते समय वित्तीय अनुशासन बनाए रखने का दावा किया है। राजस्व बढ़ाने के लिए कर संग्रह प्रणाली को सुदृढ़ करने और अनावश्यक खर्चों में कटौती करने पर भी विचार किया गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते बजट आकार के साथ-साथ वित्तीय प्रबंधन की दक्षता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

समग्र विकास की दिशा में कदम

कुल मिलाकर, कैबिनेट बैठक में लिए गए निर्णय यह संकेत देते हैं कि सरकार सामाजिक कल्याण, शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और बुनियादी ढांचे के विकास के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है।

विधानसभा सत्र में बजट पेश होने के बाद विभिन्न योजनाओं और प्रावधानों की विस्तृत जानकारी सामने आएगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी बजट राज्य की विकास दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

अब सभी की निगाहें विधानसभा सत्र पर टिकी हैं, जहां सरकार अपने विकास एजेंडे को विस्तार से प्रस्तुत करेगी और विपक्ष उसके प्रावधानों पर अपनी प्रतिक्रिया देगा।

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