ईरान हमले का असर: राजधानी के बाजारों में उछाल, महंगे हुए सोना-चांदी और मेवे, चिकनकारी निर्यात पर लगा ब्रेक

नई दिल्ली:
ईरान में हालिया हमलों का असर अब राजधानी के बाजारों में भी दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय तनाव के चलते सोना-चांदी की कीमतों में तेजी दर्ज की गई है, वहीं सूखे मेवों के दाम भी बढ़ने लगे हैं। बढ़ती कीमतों से कारोबारियों और ग्राहकों दोनों की चिंता बढ़ गई है।
सर्राफा बाजार में अनिश्चितता के माहौल के बीच सोने और चांदी की मांग बढ़ी है, जिसके चलते कीमतों में तेजी आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक अस्थिरता के समय निवेशक सुरक्षित विकल्प के तौर पर सोने की ओर रुख करते हैं, जिससे दाम ऊपर जाते हैं।
खाड़ी देशों में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और ईरान हमले का सीधा असर अब राजधानी के बाजारों पर भी दिखने लगा है। वैश्विक अनिश्चितता के बीच जहां एक ओर सोना-चांदी और सूखे मेवों की कीमतों में तेजी दर्ज की जा रही है, वहीं दूसरी ओर निर्यातकों और कारोबारियों की चिंताएं काफी बढ़ गई हैं। खाड़ी देशों को जाने वाले शिपमेंट प्रभावित होने से प्रसिद्ध चिकनकारी उद्योग को भी भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
क्या है पूरा मामला और बाजार पर इसका क्या असर पड़ रहा है, आइए विस्तार से जानते हैं:
1. सोना-चांदी के दामों में भारी तेजी
युद्ध और वैश्विक तनाव जैसी अनिश्चितताओं के बीच निवेशक हमेशा ‘सुरक्षित निवेश’ (Safe Haven) की ओर भागते हैं। इसके परिणामस्वरूप:
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राजधानी के सर्राफा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में अचानक बड़ा उछाल आया है।
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अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमती धातुओं की बढ़ती मांग का सीधा असर स्थानीय खुदरा और थोक बाजार की कीमतों पर पड़ा है।
2. सूखे मेवे (Dry Fruits) हुए महंगे
ईरान और मध्य-पूर्व के अन्य देश सूखे मेवों के प्रमुख आपूर्तिकर्ता हैं। हमले और तनाव के बाद:
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सप्लाई चेन (आपूर्ति श्रृंखला) बाधित होने की आशंका से बादाम, पिस्ता, अखरोट और अन्य मेवों की कीमतों में तेजी आ गई है।
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आयातकों का कहना है कि माल की आवक कम होने और शिपिंग के रास्ते प्रभावित होने से आने वाले दिनों में कीमतें और बढ़ सकती हैं।
3. खाड़ी देशों का शिपमेंट प्रभावित, अटका चिकनकारी का निर्यात
इस तनाव का सबसे बड़ा खामियाजा उन कारोबारियों को भुगतना पड़ रहा है जो खाड़ी देशों (Gulf Countries) के साथ व्यापार करते हैं:
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समुद्री रास्तों और हवाई उड़ानों में आ रही दिक्कतों के कारण शिपमेंट या तो होल्ड पर हैं या उनके रूट में बदलाव किया जा रहा है।
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चिकनकारी उद्योग पर सीधा असर: राजधानी और आस-पास के क्षेत्रों से खाड़ी देशों में चिकनकारी के कपड़ों की भारी मांग रहती है। शिपमेंट रुकने और लॉजिस्टिक लागत (freight charges) बढ़ने से करोड़ों रुपये के ऑर्डर अटक गए हैं, जिससे चिकनकारी निर्यातकों को भारी नुकसान होने की आशंका है।
बाजार के जानकारों और एक्सपोर्टर्स का कहना है कि अगर मध्य-पूर्व में तनाव इसी तरह जारी रहा या हालात और बिगड़े, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। त्योहारों और शादियों के सीजन से ठीक पहले कीमतों में इस तरह की बेतहाशा वृद्धि और सप्लाई चेन का टूटना छोटे और बड़े दोनों तरह के कारोबारियों के लिए एक बड़ा संकट बन गया है। व्यापारी अब सरकार से राहत और वैकल्पिक निर्यात मार्गों को सुगम बनाने की उम्मीद कर रहे हैं।



