
पूर्वांचल और बिहार के 10 से अधिक जिलों में महिलाओं और बच्चों के बीच साइकोजेनिक सिंड्रोम के मामलों में तेजी से वृद्धि देखी जा रही है। चिकित्सकीय भाषा में इस बीमारी को पीएनईएस (Psychogenic Non-Epileptic Syndrome) कहा जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार यह समस्या मानसिक तनाव और मनोवैज्ञानिक कारणों से जुड़ी होती है।
बीएचयू अस्पताल के न्यूरोलॉजी विभाग के डॉक्टरों के अनुसार, अस्पताल की ओपीडी में हर महीने इस बीमारी से प्रभावित करीब 200 मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। इन मरीजों में 8 वर्ष के बच्चों से लेकर 35 वर्ष तक की महिलाएं शामिल हैं।
डॉक्टरों की चिंता बढ़ी
विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले कुछ समय में इस बीमारी के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। कई बार मरीजों को देखने में यह बीमारी मिर्गी (Epilepsy) जैसी लगती है, लेकिन असल में यह मनोवैज्ञानिक कारणों से होने वाला सिंड्रोम है।
साइकोजेनिक सिंड्रोम के प्रमुख लक्षण
इस बीमारी में मरीजों में कई तरह के लक्षण दिखाई देते हैं, जैसे:
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मिर्गी के मरीजों की तरह शरीर में कंपन या ऐंठन होना
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कुछ समय के लिए बेहोशी जैसा महसूस होना
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सामान्य स्थिति में हाथ-पैर पटकना
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देखने में मरीज बेहोश लगे, लेकिन पूरी तरह अचेत न हो
मानसिक तनाव को माना जा रहा मुख्य कारण
डॉक्टरों के अनुसार अत्यधिक मानसिक दबाव, डर, पारिवारिक तनाव और सामाजिक समस्याएं इस बीमारी के प्रमुख कारण हो सकते हैं। समय पर पहचान और सही इलाज से मरीज पूरी तरह ठीक हो सकते हैं।



