उत्तराखंड

चारधाम यात्रा से पहले ग्राउंड रिपोर्ट: 17 दिन शेष, हाईवे पर मलबा, भूस्खलन जोन सक्रिय, स्वास्थ्य सुविधाएं नाकाफी

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चारधाम यात्रा 2026 शुरू होने में अब सिर्फ 17 दिन शेष हैं, लेकिन ऋषिकेश से देवप्रयाग तक बदरीनाथ हाईवे की जमीनी हकीकत चिंता बढ़ाने वाली है। अमर उजाला की ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक इस 75 किमी लंबे मार्ग पर 31 भूस्खलन जोन अभी भी सक्रिय हैं, जिनका ट्रीटमेंट कार्य अधूरा पड़ा है। कई स्थानों पर सड़क किनारे 100 से 250 मीटर तक मलबे के ढेर लगे हैं, जिससे यात्रा सीजन में जाम और हादसों का खतरा बढ़ गया है।

ऋषिकेश से कौड़ियाला के बीच तपोवन, शिवपुरी, गूलर, ब्यासी और कौड़ियाला जैसे प्रमुख पड़ावों पर पार्किंग, सार्वजनिक शौचालय और पेयजल की सुविधाएं भी पर्याप्त नहीं हैं। विभाग 10 दिनों में मलबा हटाने का दावा कर रहा है, लेकिन जमीनी स्थिति इस लक्ष्य को चुनौतीपूर्ण बना रही है।

सबसे गंभीर स्थिति कौड़ियाला से देवप्रयाग के बीच तोता घाटी, मुल्यागांव और एनएचपीसी बेंड जैसे इलाकों में है, जहां लगातार मलबा गिरने से कई हिस्सों में सड़क बॉटलनेक और वन-वे हो गई है। यात्रियों को बार-बार रुकना पड़ रहा है, जिससे यात्रा समय और जोखिम दोनों बढ़ रहे हैं।

स्वास्थ्य सुविधाओं की बात करें तो ऋषिकेश के बाद देवप्रयाग में ही एकमात्र सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र है, लेकिन वहां विशेषज्ञ डॉक्टर, रेडियोलॉजिस्ट और पर्याप्त पैरामेडिकल स्टाफ का अभाव है। हादसे की स्थिति में गोल्डन ऑवर के दौरान तत्काल उपचार मिलना मुश्किल हो सकता है।

हालांकि एनएच विभाग का कहना है कि भूस्खलन क्षेत्रों में मशीनें लगाकर मलबा हटाने और चौड़ीकरण का काम तेज़ी से चल रहा है, लेकिन यात्रा शुरू होने से पहले व्यवस्थाओं को पूरी तरह दुरुस्त करना सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।

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