हिमाचल में मेडिकल कॉलेज बढ़े, लेकिन सुविधाओं और स्टाफ की भारी कमी; जांच के लिए लंबा इंतजार

शिमला: हिमाचल प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़ने के बावजूद बुनियादी सुविधाओं और स्टाफ की भारी कमी ने स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कई सरकारी मेडिकल कॉलेजों में मरीजों को एक सामान्य जांच के लिए भी डेढ़ साल तक इंतजार करना पड़ रहा है, जबकि विशेषज्ञ डॉक्टरों, नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ के कई पद खाली पड़े हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य के बड़े मेडिकल संस्थानों में डायग्नोस्टिक मशीनों की कमी और पुरानी मशीनों के बार-बार खराब होने से मरीजों की परेशानी बढ़ गई है। कई जगह एमआरआई और सीटी स्कैन के लिए महीनों की वेटिंग चल रही है। इससे गंभीर मरीजों के इलाज में देरी हो रही है और उन्हें निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है।
सबसे बड़ी चुनौती डॉक्टरों और फैकल्टी की कमी है। नए मेडिकल कॉलेज खुलने के बाद भी योग्य विशेषज्ञ और शिक्षकों की भर्ती समय पर नहीं हो पाई, जिससे मेडिकल शिक्षा और इलाज दोनों प्रभावित हो रहे हैं। सरकार ने इस कमी को दूर करने के लिए सेवानिवृत्त प्रोफेसरों की नियुक्ति और कॉमन फैकल्टी कैडर जैसे कदमों पर काम शुरू किया है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जल्द स्टाफ भर्ती, मशीनों के अपग्रेडेशन और इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार पर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो बढ़ते मेडिकल कॉलेज सिर्फ इमारतों तक सीमित रह जाएंगे और मरीजों को बेहतर इलाज नहीं मिल पाएगा।



