सीजफायर के बाद भारत का बड़ा कूटनीतिक कदम: होर्मुज में फंसे 16 जहाजों को निकालने के लिए ईरान से संपर्क तेज
पश्चिम एशिया में सीजफायर के बाद भारत ने अपने होर्मुज के पश्चिम में फंसे 16 जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए ईरान से कूटनीतिक संपर्क तेज कर दिया है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक इन जहाजों में दो लाख टन से अधिक एलपीजी और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ा अहम कार्गो मौजूद है, जिसे जल्द भारत लाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। यह कदम देश में गैस और ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर रखने के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।
भारत सरकार इस पूरे मामले में विदेश मंत्रालय, शिपिंग मंत्रालय और ईरान स्थित भारतीय मिशन के साथ लगातार समन्वय कर रही है। सीजफायर के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य में सीमित आवाजाही फिर शुरू हुई है, जिससे उम्मीद जगी है कि भारतीय जहाजों को जल्द सुरक्षित कॉरिडोर मिल सकता है। भारत ने पहले भी निर्बाध नौवहन और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा पर जोर दिया था।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ये जहाज जल्द भारत पहुंचते हैं तो घरेलू एलपीजी संकट और औद्योगिक गैस आपूर्ति पर बड़ा असर कम हो सकता है। फिलहाल सभी की नजर भारत-ईरान वार्ता और होर्मुज में जहाजों की आवाजाही पर बनी हुई है, क्योंकि यह सिर्फ ऊर्जा नहीं बल्कि भारत की आर्थिक स्थिरता और सप्लाई चेन सुरक्षा से भी जुड़ा मामला है।



