मध्य पूर्व संघर्षविराम पर भारत की बड़ी प्रतिक्रिया: स्थायी शांति की उम्मीद, होर्मुज में निर्बाध नौवहन पर जोर

भारत ने मध्य पूर्व में अमेरिका-ईरान के बीच हुए संघर्षविराम का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई है कि यह कदम पश्चिम एशिया में स्थायी शांति की दिशा में निर्णायक साबित होगा। विदेश मंत्रालय ने कहा कि क्षेत्र में तनाव कम होना न केवल कूटनीतिक स्तर पर अहम है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार के लिए भी बेहद जरूरी है। भारत ने विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य में निर्बाध नौवहन की आवश्यकता पर जोर दिया, क्योंकि यह मार्ग भारत समेत दुनिया के कई देशों के लिए तेल आपूर्ति की जीवनरेखा है।
सरकार ने स्पष्ट किया कि भारत हमेशा से संवाद, कूटनीति और शांतिपूर्ण समाधान का समर्थक रहा है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, संघर्षविराम से क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा मिलेगा और इससे वैश्विक बाजारों में तेल कीमतों पर दबाव कम हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटनाक्रम से भारत की अर्थव्यवस्था को भी राहत मिलेगी, क्योंकि कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से महंगाई और आयात बिल पर सकारात्मक असर पड़ेगा।
मध्य पूर्व में लगातार बढ़ते तनाव के बीच भारत का यह बयान रणनीतिक और आर्थिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि क्षेत्र में भारतीय हित, ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री मार्ग पूरी तरह सुरक्षित रहें। फिलहाल दुनिया की नजर इस बात पर है कि यह अस्थायी संघर्षविराम क्या लंबे समय की शांति में बदल पाएगा।


