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सुप्रीम कोर्ट में 2018 के सबरीमाला फैसले की समीक्षा सुनवाई जारी, केंद्र और जज सख्त दलीलें पेश

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नई दिल्ली: भारत के सर्वोच्च न्यायालय में केरल के सबरीमाला मंदिर मामले पर 2018 के फैसले की समीक्षा सुनवाई का तीसरा दिन जारी है। इस ऐतिहासिक मामला अब मुख्य न्यायाधीश सुख़बीर कृष्णा (CJI) सूर्यकांत की नेतृत्व वाली नौ जजों की संविधान पीठ के सामने सुनवाई के तहत है, जिसमें महिलाओं के धार्मिक स्थलों में प्रवेश, धार्मिक स्वतंत्रता और समानता जैसे संवैधानिक मुद्दों पर विस्तृत बहस हो रही है।

इस मामले की शुरूआत 2018 के फैसले से होती है, जिसमें शीर्ष अदालत ने सबरीमाला मंदिर में महिलाओं (10–50 वर्ष) के प्रवेश पर लगाई गयी परंपरागत रोक को असंवैधानिक करार दिया था। इसके बाद यह मुद्दा बड़े संवैधानिक प्रश्नों के साथ पुनर्विश्लेषण (review) याचिकाओं के रूप में कोर्ट के सामने आया।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा है कि मंदिर में प्रवेश का अधिकार केवल कानून के दायरे में नहीं बल्कि आस्थाओं और विश्वासों के तहत भी समझा जाना चाहिए, और 2018 का निर्णय गलत तरीके से लागू हुआ था, इसलिए इसके पुनर्विचार की आवश्यकता है।

सुनवाई के दौरान पीठ के एक सदस्य न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना ने टिप्पणी की कि किसी महिला को “तीन दिनों के लिए अस्वीकार्य/छुआछूत” जैसा व्यवहार नहीं सहना चाहिए, और धार्मिक प्रथाओं पर निर्णय करते समय संविधान के लिंग समानता जैसे मानदंडों को भी ध्यान में रखना चाहिए।

कोर्ट इस मुद्दे को केवल सबरीमाला तक सीमित नहीं रख रहा है, बल्कि धर्म की स्वतंत्रता के दायरे, आस्था के भीतर न्यायिक समीक्षा, और संविधान के मौलिक अधिकारों के बीच संतुलन जैसे व्यापक प्रश्नों पर भी विचार कर रहा है।

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