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उत्तराखंड पंचायतों की सैकड़ों खाली सीटों से हटेगा आरक्षण: तीसरी बार चुनाव की तैयारी, शासन को भेजा गया प्रस्ताव

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देहरादून: उत्तराखंड में पंचायतों की लंबे समय से खाली पड़ी एससी, एसटी और ओबीसी आरक्षित सैकड़ों सीटों को सामान्य किए जाने की तैयारी शुरू हो गई है। पंचायतीराज निदेशालय ने शासन को प्रस्ताव भेजा है कि दो बार चुनाव और उपचुनाव के बावजूद खाली रह गई सीटों से आरक्षण हटाकर तीसरी बार चुनाव कराया जाए।

जानकारी के अनुसार, प्रदेश में ग्राम पंचायत सदस्यों के 3846 पद अब भी खाली हैं, जबकि ग्राम प्रधान की 16 और क्षेत्र पंचायत सदस्य की 3 सीटें भी रिक्त हैं। महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों को छोड़कर अन्य अधिकांश सीटों को सामान्य घोषित करने की तैयारी की जा रही है, ताकि पंचायतों का गठन जल्द पूरा हो सके।

पिछले साल जुलाई में हुए त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों में कई सीटों पर किसी प्रत्याशी ने नामांकन ही नहीं किया था, जिसके चलते हजारों पद खाली रह गए। बाद में उपचुनाव कराए गए, लेकिन स्थिति में ज्यादा सुधार नहीं हुआ। अब तीसरी बार चुनाव कराने के लिए विभिन्न जिलों के जिलाधिकारियों ने भी खाली पदों को सामान्य करने की सिफारिश की है।

इस बीच राज्य में 33 ग्राम प्रधान ऐसे भी हैं, जो जीत के आठ महीने बाद भी शपथ नहीं ले पाए, क्योंकि ग्राम पंचायत सदस्यों का कोरम पूरा नहीं होने से पंचायतों का गठन अटका हुआ है। इससे ग्रामीण विकास कार्य और योजनाएं भी प्रभावित हो रही हैं।

पंचायतीराज निदेशक निधि यादव के मुताबिक, जिलों से मिली सिफारिशों के आधार पर प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है। मंजूरी मिलते ही इन सीटों पर तीसरी बार चुनाव की प्रक्रिया शुरू होगी, जिससे पंचायत व्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

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