उत्तराखंड में वनाग्नि का बढ़ता खतरा, पौड़ी बना दूसरा सबसे प्रभावित जिला

उत्तराखंड में जंगलों में लग रही आग लगातार गंभीर चुनौती बनती जा रही है। हालात यह हैं कि पौड़ी गढ़वाल पिछले दो वर्षों से प्रदेश का दूसरा सबसे अधिक वनाग्नि प्रभावित जिला बन चुका है। वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023 से 2025 के बीच जिले में वनाग्नि की 325 घटनाएं दर्ज हुईं, जिनसे करीब 425 हेक्टेयर जंगल और जैव विविधता प्रभावित हुई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, सिविल सोयम पौड़ी, गढ़वाल वन प्रभाग और नागदेव रेंज वनाग्नि के लिहाज से सबसे अधिक संवेदनशील क्षेत्र हैं। इस साल भी फायर सीजन शुरू होने के बाद कई घटनाओं में जंगलों को नुकसान पहुंच चुका है। अप्रैल महीने में आग की घटनाएं तुलनात्मक रूप से अधिक दर्ज की गईं।
वन विभाग संसाधन बढ़ाने और फायर कंट्रोल के दावे कर रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर कर्मचारियों और संसाधनों की भारी कमी सामने आ रही है। कई रेंज में रेंजर और वन आरक्षी के पद खाली हैं, जबकि कुछ क्षेत्रों में आग बुझाने के लिए पर्याप्त वाहन तक उपलब्ध नहीं हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, चीड़ की सूखी पत्तियां (पिरुल), कम वर्षा और बढ़ती गर्मी वनाग्नि की बड़ी वजह बन रही हैं। इसके साथ ही कई मामलों में मानवजनित कारण भी सामने आते हैं, जहां लापरवाही या जानबूझकर आग लगाने की घटनाएं सामने आती हैं।



