उत्तराखंड के पहाड़ों में बढ़ रहा मानसिक तनाव, डिप्रेशन और एंग्जायटी की चपेट में ग्रामीण जीवन

उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ती नजर आ रही हैं। बदलती जीवनशैली, पलायन, अकेलापन, बेरोजगारी और लगातार बढ़ती प्राकृतिक आपदाओं के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में डिप्रेशन और एंग्जायटी के मामलों में इजाफा हो रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पहाड़ों में रहने वाले लोग लंबे समय से सामाजिक और आर्थिक दबाव झेल रहे हैं। युवाओं में रोजगार की कमी और बेहतर भविष्य की चिंता मानसिक तनाव का बड़ा कारण बन रही है, जबकि बुजुर्ग अकेलेपन और सामाजिक दूरी के चलते अवसाद का सामना कर रहे हैं।
हाल के अध्ययनों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की कमी के कारण लोग समय पर इलाज नहीं ले पा रहे हैं। कई मामलों में लोग मानसिक परेशानी को सामान्य तनाव समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे स्थिति और गंभीर हो जाती है।
विशेषज्ञों ने मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता बढ़ाने, गांव स्तर पर काउंसलिंग सेवाएं शुरू करने और युवाओं के लिए रोजगार एवं सामाजिक सहयोग बढ़ाने की जरूरत बताई है। उनका मानना है कि यदि समय रहते इस समस्या पर ध्यान नहीं दिया गया, तो पहाड़ों में मानसिक स्वास्थ्य संकट और गहरा सकता है।



