उत्तराखंड

स्टार्टअप वेंचर फंड योजना लालफीताशाही में फंसी, उद्यमियों को नहीं मिल पा रहा वित्तीय सहयोग

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उत्तराखंड में नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की गई स्टार्टअप वेंचर फंड योजना अब प्रशासनिक प्रक्रियाओं और लालफीताशाही के कारण अटकती नजर आ रही है। योजना का लाभ पाने की उम्मीद लगाए बैठे कई स्टार्टअप उद्यमियों को अब तक अपेक्षित वित्तीय सहायता नहीं मिल पाई है, जिससे राज्य के स्टार्टअप इकोसिस्टम पर असर पड़ रहा है।

जानकारी के अनुसार, राज्य में स्टार्टअप संस्कृति को मजबूत करने और युवाओं को रोजगार सृजन के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से वेंचर फंड की व्यवस्था की गई थी। हालांकि, योजना के क्रियान्वयन में देरी, जटिल प्रक्रियाओं और मंजूरी संबंधी बाधाओं के चलते फंड का लाभ जमीन पर सीमित ही दिखाई दे रहा है।

स्टार्टअप से जुड़े उद्यमियों का कहना है कि शुरुआती चरण में पूंजी की उपलब्धता किसी भी नए व्यवसाय के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है। लेकिन योजना के तहत सहायता प्राप्त करने की प्रक्रिया लंबी और जटिल होने के कारण कई युवा उद्यमी निराश हैं। उनका मानना है कि समय पर वित्तीय सहयोग नहीं मिलने से कई नवाचार आधारित परियोजनाएं आगे नहीं बढ़ पा रही हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि स्टार्टअप को शुरुआती दौर में पर्याप्त निवेश और संस्थागत समर्थन नहीं मिलता है, तो नवाचार और रोजगार सृजन की संभावनाएं प्रभावित हो सकती हैं। उन्होंने सरकार से योजना की प्रक्रियाओं को सरल बनाने और फंड वितरण में तेजी लाने की मांग की है।

वहीं, संबंधित विभाग का कहना है कि योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं और पात्र स्टार्टअप्स को लाभ पहुंचाने के प्रयास जारी हैं। हालांकि, उद्यमियों का मानना है कि यदि जल्द ही अड़चनें दूर नहीं की गईं तो राज्य में स्टार्टअप विकास की रफ्तार प्रभावित हो सकती है।

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