जोजिला टनल की ऐतिहासिक सफलता में ईरानी इंजीनियर की अहम भूमिका, बोले- भारत अब मेरा दूसरा घर

कश्मीर और लद्दाख को हर मौसम में जोड़ने वाली रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जोजिला टनल परियोजना ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल कर ली है। टनल के अंतिम ब्रेकथ्रू के साथ ही इस महत्वाकांक्षी परियोजना ने निर्माण के क्षेत्र में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। इस मौके पर परियोजना से जुड़े एक ईरानी इंजीनियर ने भारत के प्रति अपना विशेष लगाव व्यक्त करते हुए कहा कि भारत अब उनका दूसरा घर बन चुका है।
ईरानी इंजीनियर यूसुफ इसहाकपुर रहीमाबादी कई वर्षों से इस परियोजना से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि हिमालय की कठिन परिस्थितियों में काम करना चुनौतीपूर्ण जरूर था, लेकिन भारतीय टीम और स्थानीय लोगों के सहयोग ने उन्हें हमेशा अपनापन महसूस कराया। उनके अनुसार, यह परियोजना केवल एक सुरंग नहीं बल्कि लाखों लोगों के जीवन को आसान बनाने वाला बदलाव है।
करीब 13 किलोमीटर लंबी जोजिला टनल के निर्माण से कश्मीर और लद्दाख के बीच सालभर सड़क संपर्क संभव हो सकेगा। अभी तक भारी बर्फबारी के कारण जोजिला दर्रा सर्दियों में कई महीनों तक बंद रहता है, जिससे आवागमन और आपूर्ति प्रभावित होती है। टनल के चालू होने के बाद यात्रा समय में भारी कमी आएगी और क्षेत्रीय विकास को भी गति मिलेगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह परियोजना सामरिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण है। इससे सीमावर्ती क्षेत्रों तक सेना और जरूरी सामग्री की आवाजाही पूरे वर्ष बनी रहेगी, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।



