सुप्रीम कोर्ट: मौत की सजा के लिए फांसी का तरीका बरकरार, कम दर्दनाक विकल्प की याचिका खारिज

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मौत की सजा पाए दोषियों को फांसी देने के मौजूदा तरीके को बरकरार रखा है। अदालत ने उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें फांसी की जगह मौत की सजा देने के किसी अन्य कम पीड़ादायक तरीके पर विचार करने की मांग की गई थी।
अदालत ने स्पष्ट किया कि मौजूदा कानूनी व्यवस्था के तहत मौत की सजा पाए दोषी को फांसी देकर ही मृत्युदंड दिया जाएगा। याचिका में फांसी की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाते हुए ऐसे विकल्प की मांग की गई थी, जिसमें दोषी को कम से कम शारीरिक पीड़ा हो।
मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मौजूदा व्यवस्था और कानून के प्रावधानों पर विचार किया। अदालत के फैसले के बाद फिलहाल भारत में मृत्युदंड को लागू करने के लिए फांसी की प्रक्रिया ही प्रभावी रहेगी।
फांसी के तरीके को चुनौती दी गई थी
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत के समक्ष दलील दी गई थी कि मौत की सजा को अपेक्षाकृत कम दर्दनाक तरीके से लागू करने के विकल्पों पर विचार किया जाना चाहिए। याचिका में फांसी की प्रक्रिया की जगह अन्य मानवीय विकल्प अपनाने की मांग की गई थी।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया और मौत की सजा के लिए फांसी के मौजूदा प्रावधान को जारी रखा।
इस फैसले के साथ अदालत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जब तक कानून में कोई बदलाव नहीं किया जाता, भारत में मृत्युदंड पाने वाले दोषियों को फांसी के जरिए ही सजा-ए-मौत दी जाएगी।



