नेपाल में चमेलिया नदी पर बनी कृत्रिम झील से उत्तराखंड में बाढ़ का खतरा, पिथौरागढ़ से चंपावत तक 50 हजार लोग प्रभावित होने की आशंका

नेपाल के दार्चुला में भूस्खलन से चमेलिया नदी का बहाव रुकने के बाद वहां कृत्रिम झील बनने से उत्तराखंड के सीमावर्ती इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। भट्टार क्षेत्र में बनी यह झील भारतीय सीमा से करीब 40 किलोमीटर हवाई दूरी पर है। चमेलिया नदी आगे चलकर महाकाली नदी में मिलती है, जो भारत-नेपाल की सीमा का निर्धारण करती है।
खतरे को देखते हुए पिथौरागढ़ जिले के सीमावर्ती क्षेत्रों में नदी के जलस्तर पर निगरानी बढ़ा दी गई है। धारचूला क्षेत्र में भारी बारिश के बाद काली नदी का जलस्तर चेतावनी स्तर से महज 10 सेंटीमीटर नीचे पहुंच गया है। चेतावनी स्तर 889 मीटर है, जबकि नदी 888.90 मीटर पर बह रही है। धारचूला, जौलजीबी, बलुवाकोट और झूलाघाट समेत नदी किनारे बसे इलाकों में लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
प्रशासन के मुताबिक, यदि नेपाल में बनी झील से अचानक पानी का तेज बहाव आता है और चमेलिया-महाकाली नदी में स्थिति बिगड़ती है, तो पिथौरागढ़ से लेकर चंपावत और टनकपुर तक के सीमावर्ती इलाकों की 50 हजार से अधिक आबादी प्रभावित हो सकती है।
इधर, बनबसा बैराज पर भी लगातार चौथे दिन रेड अलर्ट रहा। शारदा नदी का जलस्तर शुक्रवार दोपहर दो बजे 1,31,334 क्यूसेक दर्ज किया गया। सुरक्षा के मद्देनजर बैराज से चार पहिया वाहनों की आवाजाही पर रोक जारी रही।
बारिश के कारण पिथौरागढ़-घाट ऑलवेदर सड़क भी मुन्ना बैंड के पास पहाड़ी दरकने से बंद हो गई। मलबा और बोल्डर हटाने के लिए जेसीबी भेजी गई, लेकिन देर रात तक यातायात बहाल नहीं हो सका।



