देहरादून में बड़ा सवाल: राजधानी में छात्रों तक आखिर कौन पहुंचा रहा अवैध हथियार? गोलीकांड के बाद कानून व्यवस्था पर उठे सवाल

देहरादून: राजधानी देहरादून में हाल के दिनों में छात्रों से जुड़े लगातार हिंसक घटनाक्रमों ने कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ताजा गोलीकांड के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि आखिर छात्रों तक अवैध हथियार पहुंच कौन रहा है। शहर में बीते दो महीनों में दिनदहाड़े हत्या और फायरिंग की कई वारदातें सामने आई हैं, जिससे आम लोगों में डर का माहौल है।
ताजा मामले में मसूरी रोड स्थित एक रेस्टोरेंट से जोहड़ी गांव तक करीब तीन किलोमीटर तक दो तेज रफ्तार कारों से एक-दूसरे पर गोलियां बरसाई गईं। इस सनसनीखेज वारदात में सुबह सैर पर निकले सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर मुकेश कुमार जोशी की गोली लगने से मौत हो गई। घटना ने शहर की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, घटना में शामिल दो गुटों में से एक गुट विश्वविद्यालय के छात्रों का बताया जा रहा है। यही वजह है कि पुलिस की जांच अब इस दिशा में भी तेज हो गई है कि इन युवाओं को अवैध पिस्टल और कारतूस कहां से मिल रहे हैं। लगातार सामने आ रहे छात्र गैंगवार और फायरिंग के मामलों ने अभिभावकों और शिक्षण संस्थानों की चिंता बढ़ा दी है।
हाल ही में प्रेमनगर में उत्तरांचल यूनिवर्सिटी के छात्र दिव्यांशु जटराना की दो छात्र गुटों के बीच वर्चस्व की लड़ाई में हत्या कर दी गई थी। इसके अलावा पौंधा और विकासनगर में भी छात्रों और युवकों के बीच मारपीट, फायरिंग और रॉड से हमले जैसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इन मामलों ने साफ कर दिया है कि छात्र गुटों के बीच हिंसा अब गंभीर आपराधिक रूप ले रही है।
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि जिस क्षेत्र में यह फायरिंग हुई, वहां एक स्कूल भी मौजूद है। गनीमत रही कि स्कूल बंद था, वरना कोई बड़ा हादसा हो सकता था। विशेषज्ञों का मानना है कि अवैध हथियारों की सप्लाई चेन और छात्र गैंग कल्चर पर सख्त कार्रवाई किए बिना ऐसी घटनाओं पर रोक लगाना मुश्किल होगा।



