बिहार में स्टाइपेंड के बावजूद AEDP कोर्स से छात्रों की दूरी, कई कॉलेजों में सीटें खाली

बिहार में रोजगार आधारित अप्रेंटिसशिप एम्बेडेड डिग्री प्रोग्राम (AEDP) को बढ़ावा देने के प्रयासों के बावजूद छात्रों का रुझान अपेक्षा से काफी कम देखने को मिल रहा है। मासिक स्टाइपेंड और उद्योगों में प्रशिक्षण जैसी सुविधाएं मिलने के बाद भी कई कॉलेजों में इस कोर्स की सीटें खाली हैं।
शिक्षा विभाग के अनुसार, AEDP चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम है, जिसमें पढ़ाई के साथ उद्योगों में अप्रेंटिसशिप का अवसर दिया जाता है। प्रशिक्षण अवधि के दौरान छात्रों को निर्धारित नियमों के तहत स्टाइपेंड भी मिलता है, ताकि वे पढ़ाई के साथ व्यावहारिक अनुभव हासिल कर सकें।
इसके बावजूद कई छात्र पारंपरिक स्नातक पाठ्यक्रमों को प्राथमिकता दे रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि नए कोर्स के बारे में पर्याप्त जानकारी का अभाव, जागरूकता की कमी और भविष्य की संभावनाओं को लेकर असमंजस इसके पीछे प्रमुख कारण हो सकते हैं।



