समय से पहले दस्तक दे सकता है एल नीनो, भारत में सूखे और कमजोर मानसून का खतरा बढ़ा

दुनियाभर के मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि इस साल एल नीनो सामान्य से पहले सक्रिय हो सकता है, जिसका सीधा असर भारत के मानसून पर पड़ने की आशंका है। अमेरिकी मौसम एजेंसी NOAA और कई अंतरराष्ट्रीय जलवायु मॉडलों के अनुसार मई-जुलाई के बीच एल नीनो की स्थिति तेजी से मजबूत हो सकती है।
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि एल नीनो के कारण भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून कमजोर पड़ सकता है, जिससे कई राज्यों में सूखे जैसे हालात बन सकते हैं। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने भी 2026 के मानसून को “सामान्य से कम” रहने की आशंका जताई है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्यों में बारिश की कमी का सबसे ज्यादा असर देखने को मिल सकता है। वहीं दिल्ली-एनसीआर समेत कई इलाकों में भीषण गर्मी और जल संकट की आशंका बढ़ गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार एल नीनो प्रशांत महासागर के सतही तापमान में असामान्य बढ़ोतरी के कारण बनता है, जो वैश्विक मौसम प्रणाली को प्रभावित करता है। इसका असर भारत में मानसूनी हवाओं को कमजोर करने के रूप में दिखाई देता है।
हालांकि कुछ मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि पॉजिटिव इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) जैसी परिस्थितियां एल नीनो के असर को कुछ हद तक कम कर सकती हैं, लेकिन फिलहाल स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि एल नीनो बेहद मजबूत हुआ तो इसका असर खेती, जल भंडारण, बिजली उत्पादन और खाद्य कीमतों पर भी पड़ सकता है। भारत की करीब 60 प्रतिशत खेती अब भी मानसूनी बारिश पर निर्भर है, ऐसे में कमजोर मानसून अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।



