उत्तराखंड के पांच जिलों के सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील की होगी जांच, भोजन की गुणवत्ता और रिकॉर्ड की होगी पड़ताल

देहरादून: उत्तराखंड सरकार ने सरकारी स्कूलों में बच्चों को परोसे जा रहे मिड-डे मील (पीएम पोषण योजना) की गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए राज्य के पांच जिलों में विशेष जांच कराने का निर्णय लिया है। यह कदम हाल ही में हरिद्वार के मदरसों में नामांकन संबंधी अनियमितताओं के सामने आने के बाद उठाया गया है।
शिक्षा विभाग के निर्देश पर जांच के दौरान स्कूलों में बच्चों की वास्तविक उपस्थिति, मिड-डे मील के लिए उपयोग की जा रही खाद्य सामग्री, भोजन की गुणवत्ता, वितरण व्यवस्था और संबंधित अभिलेखों का सत्यापन किया जाएगा। अधिकारियों को यह भी जांचने के निर्देश दिए गए हैं कि योजना के तहत मिलने वाला लाभ वास्तविक विद्यार्थियों तक पहुंच रहा है या नहीं।
राज्य सरकार का कहना है कि मिड-डे मील योजना का उद्देश्य बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के साथ-साथ स्कूलों में नामांकन और उपस्थिति बढ़ाना है। ऐसे में किसी भी प्रकार की अनियमितता को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
शिक्षा विभाग के इस कदम को सरकारी स्कूलों में जवाबदेही और निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।



