पराली जलाने की समस्या का मिलेगा समाधान, कृषि कचरे से तैयार होगा पर्यावरण अनुकूल सड़क निर्माण सामग्री

देश में पराली और फसल अवशेषों के निपटारे को लेकर बड़ी पहल सामने आई है। सीएसआईआर-इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम (IIP), देहरादून ने ऐसी तकनीक विकसित की है, जिसके जरिए फसल अवशेषों का उपयोग सड़क निर्माण में किया जा सकेगा। इस नई तकनीक से तैयार बायो-बाइंडर सड़क निर्माण में इस्तेमाल होने वाली पारंपरिक सामग्री का विकल्प बन सकता है।
इस तकनीक का उद्देश्य किसानों द्वारा खेतों में जलाए जाने वाले फसल अवशेषों का बेहतर उपयोग करना है। पराली जलाने से होने वाले वायु प्रदूषण को कम करने के साथ-साथ इससे किसानों को अतिरिक्त आय का अवसर भी मिल सकता है।
आईआईपी की ओर से विकसित इस तकनीक में कृषि अवशेषों से जैव आधारित सामग्री तैयार की जाती है, जिसे सड़क निर्माण में इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे पेट्रोलियम आधारित बिटुमेन पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी और पर्यावरण के अनुकूल सड़कों के निर्माण को बढ़ावा मिलेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में हर साल बड़ी मात्रा में फसल अवशेष पैदा होते हैं, जिनका उचित प्रबंधन एक बड़ी चुनौती है। इस तकनीक के जरिए कृषि कचरे को उपयोगी संसाधन में बदला जा सकेगा।
आईआईपी की यह पहल स्वच्छ पर्यावरण, सतत विकास और ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। आने वाले समय में इस तकनीक के व्यापक उपयोग से सड़क निर्माण क्षेत्र में नई संभावनाएं पैदा हो सकती हैं।



