उत्तराखंड: 7,184 गांवों में बारिश का सटीक रिकॉर्ड, लगाए जाएंगे ऑटोमैटिक रेन गेज

देहरादून: उत्तराखंड में अब गांव-गांव होने वाली बारिश का सटीक रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। इसके लिए राज्य के 7,184 गांवों में ऑटोमैटिक रेन गेज (स्वचालित वर्षामापी यंत्र) लगाए जाने की योजना है। इसके साथ ही हर ब्लॉक में ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन भी स्थापित किए जा रहे हैं।
मौसम से जुड़ी जानकारी को अधिक सटीक बनाने के लिए यह काम केंद्र सरकार के सहयोग से किया जा रहा है। अभी तक 73 स्थानों पर ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन स्थापित किए जा चुके हैं और इनसे मौसम संबंधी आंकड़े भी मिलना शुरू हो गए हैं। सरकार ने इस काम को सितंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है।
799 स्थानों पर भी लगेंगे उपकरण
योजना के दूसरे चरण में 799 स्थानों पर वर्षामापी और आर्द्रता मापने वाले उपकरण लगाए जाएंगे। वहीं, 7,184 गांवों में स्वचालित वर्षामापी यंत्र लगाए जाने से स्थानीय स्तर पर बारिश की मात्रा और उसके पैटर्न का सटीक डाटा उपलब्ध हो सकेगा।
किसानों को मिलेगा सबसे बड़ा फायदा
ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन और रेन गेज से किसानों को मौसम की स्थिति की बेहतर जानकारी मिल सकेगी। बारिश और आर्द्रता के सटीक आंकड़ों के आधार पर किसान फसल की सुरक्षा के लिए समय रहते जरूरी कदम उठा सकेंगे।
अधिकारियों के अनुसार, आर्द्रता बढ़ने पर आलू जैसी फसलों में बीमारी का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में समय रहते जानकारी मिलने से किसान फसल को नुकसान से बचाने की तैयारी कर सकेंगे। साथ ही किसी क्षेत्र में कम या ज्यादा बारिश होने की सटीक जानकारी मिलने पर खेती के तरीकों में भी बदलाव किया जा सकेगा।
फसल बीमा और आपदा प्रबंधन में भी मदद
स्थानीय स्तर पर बारिश के प्रमाणिक आंकड़े उपलब्ध होने से किसानों को फसल बीमा के तहत मुआवजा प्राप्त करने में भी सुविधा होगी। इसके अलावा मौसम से जुड़ा यह डाटा आपदा प्रबंधन विभाग और शोध संस्थानों के लिए भी उपयोगी साबित होगा।
सरकार का मानना है कि राज्य के दूरदराज के गांवों तक मौसम की सटीक जानकारी पहुंचने से कृषि, आपदा प्रबंधन और मौसम पूर्वानुमान की व्यवस्था को और मजबूत किया जा सकेगा।



