उत्तराखंड: पिछले दस साल में 14,372 किमी ग्रामीण सड़कें बनीं, केंद्र से और सड़कों की मांग

देहरादून: उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क कनेक्टिविटी बढ़ाने की दिशा में पिछले एक दशक में तेजी से काम हुआ है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के तहत पिछले दस वर्षों में राज्य में करीब 14,372 किलोमीटर ग्रामीण सड़कों का निर्माण किया गया है। यह आंकड़ा योजना की शुरुआत से वर्ष 2016-17 तक बनी 7,539 किलोमीटर सड़कों की लंबाई से लगभग दोगुना है।
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की शुरुआत वर्ष 2000-01 में हुई थी। उत्तराखंड में वर्ष 2014-15 तक इस योजना के तहत 4,525 किलोमीटर ग्रामीण सड़कें बनाई गई थीं। इसके बाद निर्माण कार्य में तेजी आई। वर्ष 2015-16 में पहली बार एक वित्तीय वर्ष में एक हजार किलोमीटर से अधिक यानी 1,025 किलोमीटर सड़क का निर्माण हुआ, जबकि 2016-17 में 1,989 किलोमीटर सड़कें बनाई गईं। इस तरह 2016-17 तक कुल 7,539 किलोमीटर सड़कें तैयार हो चुकी थीं।
2017-18 के बाद निर्माण में आई तेजी
वित्त वर्ष 2017-18 के बाद ग्रामीण सड़कों के निर्माण की रफ्तार और बढ़ी। 2017-18 से पिछले वित्त वर्ष तक 14,341 किलोमीटर सड़कें बन चुकी थीं। चालू वित्त वर्ष में बनी सड़कों को जोड़ने के बाद यह आंकड़ा करीब 14,372 किलोमीटर पहुंच गया है।
कोरोना काल के दौरान भी ग्रामीण सड़क निर्माण को प्राथमिकता दी गई। वर्ष 2019-20 में 2,036 किलोमीटर, 2020-21 में 3,365 किलोमीटर और 2021-22 में 2,061 किलोमीटर सड़कें बनीं। यानी इन तीन वर्षों में ही कुल 7,462 किलोमीटर ग्रामीण सड़कें तैयार की गईं।
2013 से 2019 तक पुरानी सड़कों के पुनर्निर्माण पर जोर
रिपोर्ट के अनुसार, 2013 से 2019 के बीच नई सड़कें बनाने के बजाय पहले से मौजूद सड़कों के पुनर्निर्माण और सुधार पर अधिक ध्यान दिया गया। इसके कारण इस अवधि में सड़क नेटवर्क की लंबाई में अपेक्षाकृत कम वृद्धि हुई। वर्ष 2019 के बाद नई ग्रामीण सड़कों के निर्माण पर ज्यादा जोर दिया गया।
पीएमजीएसवाई के 2024-29 के चौथे चरण में नई बस्तियों को सड़क नेटवर्क से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। उत्तराखंड सरकार ने राज्य के लिए और अधिक सड़कों की मांग केंद्र के सामने रखी है।
हर गांव को हर मौसम में सड़क से जोड़ने का लक्ष्य
ग्राम्य विकास मंत्री भरत सिंह चौधरी ने कहा कि सरकार का लक्ष्य राज्य के सभी गांवों को अच्छी और हर मौसम में उपयोगी सड़कों से जोड़ना है। इससे ग्रामीणों को आवागमन में सुविधा मिलने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर विकास और रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा मिलेगा। सरकार ने केंद्र से अधिक ग्रामीण सड़कों को मंजूरी देने की मांग की है।



