उत्तराखंड मौसम: अगस्त में बारिश ने किया निराश, 2020 के बाद सबसे कम बारिश दर्ज; जौलीग्रांट में 374.7 मिमी पानी बरसा

देहरादून। उत्तराखंड में इस साल अगस्त का महीना बारिश के लिहाज से निराशाजनक रहा। देहरादून एयरपोर्ट स्थित मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त 2026 में कुल 374.7 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो वर्ष 2020 के बाद अगस्त महीने में सबसे कम है। इससे पहले अगस्त 2020 में 297.2 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई थी।
आंकड़ों के मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों में अगस्त में बारिश का स्तर इससे काफी अधिक रहा। अगस्त 2021 में 566.4 मिमी, 2022 में 434.1 मिमी, 2023 में 745.8 मिमी, 2024 में 693.5 मिमी और 2025 में 986.9 मिमी बारिश दर्ज की गई थी। इस लिहाज से इस बार अगस्त की बारिश में बड़ी गिरावट देखने को मिली है।
जुलाई में हुई थी सामान्य से अधिक बारिश
खास बात यह है कि अगस्त से पहले जुलाई में बारिश का आंकड़ा काफी बेहतर रहा था। देहरादून एयरपोर्ट पर जुलाई 2025 में 499.3 मिमी बारिश दर्ज हुई थी, जबकि जुलाई 2026 में 570.7 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई। यानी इस साल जुलाई में पिछले वर्ष की तुलना में करीब 71 मिमी अधिक बारिश हुई।
नदियों के जलस्तर और भूजल पर चिंता
अगस्त में कम बारिश का असर फिलहाल धान और अन्य खरीफ फसलों पर गंभीर रूप से नहीं पड़ा है। हालांकि, कम वर्षा के कारण भूजल स्तर प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। देहरादून क्षेत्र की प्रमुख नदियों सौंग, सुसवा और जाखन में भी अभी तक अपेक्षाकृत कम पानी आया है।
जल संस्थान के अधिकारियों के अनुसार, कम बारिश के कारण फिलहाल नलकूपों पर कोई खास दबाव नहीं पड़ा है। खेतों में बारिश के कारण सिंचाई की जरूरत कम रहने से कृषि नलकूपों को भी राहत मिली है और पेयजल नलकूप सामान्य रूप से काम कर रहे हैं।
कमजोर मानसून के पीछे बताए जा रहे कई कारण
मौसम वैज्ञानिकों ने इस साल कमजोर मानसून की संभावना के पीछे प्रशांत महासागर में अल नीनो का प्रभाव, कमजोर मानसूनी हवाएं और कम दबाव वाले क्षेत्रों के कमजोर होने जैसे कारण बताए हैं। हालांकि, जुलाई में हुई अच्छी बारिश ने कुछ हद तक इसकी भरपाई की थी, लेकिन अगस्त में बारिश की कमी ने चिंता बढ़ा दी है।
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक बारिश में कमी रहने से जलस्रोतों, नदियों और भूजल पर असर पड़ सकता है। ऐसे में आने वाले महीनों में बारिश के पैटर्न पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।



