
कोलकाता। कलकत्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल में बुलडोजर से दुकानों और अन्य निर्माणों को हटाने की कार्रवाई पर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि किसी व्यक्ति या दुकानदार का कब्जा अवैध भी पाया जाता है, तब भी उसे हटाने के लिए कानूनी प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है। कोई भी निजी व्यक्ति या संगठन कानून अपने हाथ में नहीं ले सकता।
मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने राज्य सरकार से सवाल किया कि दुकानदारों को हटाने के लिए निजी लोगों द्वारा जेसीबी का इस्तेमाल कैसे किया गया। अदालत ने कहा कि सरकार बदलने के बाद किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार नहीं मिल जाता।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि दुकानदार अवैध कब्जाधारी पाए जाते हैं, तो संबंधित अधिकारियों को उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए। बिना सक्षम अधिकारी के आदेश के किसी को हटाना उचित नहीं है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने इस बात पर भी जोर दिया कि अतिक्रमण की शिकायत होने मात्र से किसी व्यक्ति की दुकान या आजीविका को मनमाने तरीके से नुकसान नहीं पहुंचाया जा सकता। ऐसे मामलों में निर्धारित कानूनी प्रक्रिया अपनाना जरूरी है।
अदालत की टिप्पणी ऐसे मामलों में सामने आई है, जहां पश्चिम बंगाल में कथित अतिक्रमण हटाने के लिए बुलडोजर के इस्तेमाल को लेकर शिकायतें की गई थीं।



