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उत्तराखंड के चमोली जिले की नीती घाटी में ग्लेशियरों और हिमखंडों से जुड़े संभावित खतरों की निगरानी के लिए अर्ली वार्निंग सिस्टम स्थापित किया जाएगा। इसके लिए वैज्ञानिकों की टीम सीमांत क्षेत्र के लिए रवाना हो गई है।
पिछले महीने नेपाल में आई आपदा के बाद ग्लेशियरों और हिमखंडों से होने वाले संभावित खतरों को लेकर सतर्कता बढ़ाई गई है। इसी के तहत दुर्घटना की आशंका वाले क्षेत्रों को चिह्नित कर वहां पूर्व चेतावनी प्रणाली स्थापित की जा रही है, ताकि खतरे की स्थिति में समय रहते जानकारी मिल सके।
एसडीएम चंद्रशेखर वशिष्ठ के अनुसार, वैज्ञानिकों का दल नीती घाटी में यह सिस्टम लगाएगा। टीम ने सीमांत क्षेत्र में जाने के लिए प्रशासन से इनर लाइन की अनुमति ली है। अभियान में अन्य विभागों के अधिकारी और कर्मचारी भी शामिल हैं।



