टिहरी में बढ़ता खतरा: 54% बुनियादी ढांचा हाई-रिस्क जोन में, वाडिया इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट से बढ़ी चिंता

उत्तराखंड के टिहरी जिले को लेकर एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी द्वारा तैयार किए गए नक्शे के अनुसार जिले का करीब 54 प्रतिशत बुनियादी ढांचा हाई-रिस्क जोन में स्थित है, जिससे भविष्य में बड़े खतरे की आशंका जताई जा रही है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि टिहरी का बड़ा हिस्सा भूस्खलन, भूकंप और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के लिहाज से बेहद संवेदनशील है। पहाड़ी क्षेत्रों की भौगोलिक बनावट और लगातार बदलते मौसम पैटर्न इस खतरे को और बढ़ा रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, जिन क्षेत्रों को हाई-रिस्क जोन में रखा गया है, वहां सड़क, भवन और अन्य निर्माण कार्य भविष्य में गंभीर जोखिम पैदा कर सकते हैं। ऐसे इलाकों में बिना वैज्ञानिक अध्ययन के निर्माण कार्य करना खतरनाक साबित हो सकता है।
रिपोर्ट यह भी संकेत देती है कि विकास कार्यों और बढ़ते इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के कारण पहाड़ों की स्थिरता प्रभावित हो रही है, जिससे भूस्खलन और जमीन धंसने की घटनाएं बढ़ सकती हैं।
विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि भविष्य की योजना और निर्माण कार्यों में भूवैज्ञानिक अध्ययन और वैज्ञानिक मानकों को प्राथमिकता दी जाए, ताकि संभावित आपदाओं के खतरे को कम किया जा सके।



