आईसीएआर रिपोर्ट में बड़ा खुलासा: उत्तराखंड के नौ जिलों में जलवायु परिवर्तन से खेती पर गहराया संकट

उत्तराखंड में जलवायु परिवर्तन का असर अब खेती पर गंभीर रूप से दिखाई देने लगा है। आईसीएआर की ताजा रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि राज्य के नौ जिलों में कृषि पर बड़ा संकट मंडरा रहा है, जहां तापमान में बढ़ोतरी, अनियमित बारिश और मौसम के बदलते पैटर्न से फसल उत्पादन प्रभावित हो रहा है। रिपोर्ट के अनुसार कई इलाकों में खेत-खलिहान बंजर होने की आशंका तक बढ़ गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पहाड़ी जिलों में सर्दियों की अवधि घटने, बर्फबारी कम होने और वर्षा में कमी के कारण गेहूं, मंडुवा, सब्जियों और बागवानी फसलों पर सबसे ज्यादा असर पड़ रहा है। हाल के कृषि मौसम बुलेटिन में भी उत्तराखंड में 48 प्रतिशत तक वर्षा की कमी दर्ज की गई, जिससे नमी आधारित खेती वाले क्षेत्रों में जोखिम और बढ़ गया है।
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है that अगर समय रहते जलवायु-अनुकूल खेती, सूखा सहनशील बीज, माइक्रो इरिगेशन और फसल विविधीकरण जैसे उपाय नहीं अपनाए गए, तो आने वाले वर्षों में किसानों की आय और खाद्य सुरक्षा दोनों पर गहरा असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों ने विशेष रूप से संवेदनशील जिलों में वैज्ञानिक सलाह और मौसम आधारित कृषि सेवाओं को मजबूत करने की जरूरत बताई है।
यह रिपोर्ट उत्तराखंड के कृषि तंत्र के लिए एक गंभीर चेतावनी मानी जा रही है। राज्य की बड़ी आबादी आज भी वर्षा आधारित खेती पर निर्भर है, ऐसे में जलवायु परिवर्तन का यह बढ़ता खतरा ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए भी चुनौती बन सकता है।


