उत्तराखंड हाईकोर्ट: पिता अपनी जिम्मेदारी से यह कहकर नहीं बच सकता कि मां की आय या व्यक्तिगत कर्ज हैं

नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि पिता अपनी नाबालिग संतान के भरण-पोषण (मेंटेनेंस) की जिम्मेदारी से इस आधार पर नहीं बच सकता कि मां की आय है या उसके पास व्यक्तिगत कर्ज और आर्थिक दायित्व हैं।
अदालत ने कहा कि नाबालिग बच्चों का भरण-पोषण माता-पिता का वैधानिक दायित्व है और यह जिम्मेदारी प्राथमिक है, जिसे किसी भी प्रकार की निजी वित्तीय कठिनाइयों के आधार पर टाला नहीं जा सकता।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि भले ही मां भी आय अर्जित कर रही हो, फिर भी पिता की जिम्मेदारी स्वतः समाप्त नहीं हो जाती। भरण-पोषण तय करते समय दोनों माता-पिता की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखा जा सकता है, लेकिन बच्चे के अधिकार को प्राथमिकता दी जाएगी।
यह निर्णय एक पारिवारिक विवाद से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान आया, जिसमें पिता ने दलील दी थी कि उसकी आर्थिक स्थिति कमजोर है और उस पर कर्ज का बोझ है।



