उत्तराखंड में बढ़ती चुनौती: जंगल की आग और अतिवृष्टि से पर्यावरण पर खतरा

उत्तराखंड में जंगल की आग और अत्यधिक बारिश (अतिवृष्टि) एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आ रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, इसके पीछे जलवायु परिवर्तन एक प्रमुख कारण है, जिससे मौसम के पैटर्न में तेजी से बदलाव देखा जा रहा है।
राज्य में 2010 से 2025 के बीच 18 हजार से अधिक वनाग्नि की घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं, जिनमें 30 हजार हेक्टेयर से ज्यादा वन संपदा प्रभावित हुई है। वहीं, सिर्फ 15 फरवरी से 21 अप्रैल 2026 के बीच 144 वनाग्नि की घटनाओं में जैव विविधता को नुकसान पहुंचा है।
वन विभाग के अनुसार, पौड़ी गढ़वाल, उत्तरकाशी और पिथौरागढ़ जैसे जिले वनाग्नि के लिहाज से बेहद संवेदनशील हैं। सर्दियों में कम बारिश और बर्फबारी के कारण जंगल सूख जाते हैं, जिससे आग लगने का खतरा बढ़ जाता है।
वहीं दूसरी ओर, राज्य में बारिश का पैटर्न भी बदल रहा है। कम समय में अत्यधिक बारिश (क्लाउडबर्स्ट जैसी स्थिति) से आपदाओं का खतरा बढ़ गया है। पिछले कुछ वर्षों में कई इलाकों में भारी बारिश के कारण नुकसान भी हुआ है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के चलते एक तरफ सूखा और जंगलों में आग बढ़ रही है, तो दूसरी तरफ अचानक भारी बारिश नई चुनौतियां खड़ी कर रही है। ऐसे में राज्य को दोनों स्थितियों से निपटने के लिए बेहतर आपदा प्रबंधन और दीर्घकालिक रणनीति की जरूरत है।


