जोशीमठ में बढ़ा भू-धंसाव का खतरा: 80 मीटर तक नहीं मिली ठोस चट्टान, नदी की ओर खिसक रहा शहर

उत्तराखंड के जोशीमठ में भू-धंसाव (लैंड सब्सिडेंस) का खतरा और गहराता जा रहा है। ताजा सर्वे में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि करीब 80 मीटर गहराई तक भी ठोस चट्टान नहीं मिली, जिससे क्षेत्र की जमीन की स्थिरता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, शहर धीरे-धीरे नदी की ओर खिसक रहा है, जिससे कई इलाकों में जमीन धंसने का खतरा बढ़ गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति भविष्य में बड़े नुकसान का कारण बन सकती है।
बताया जा रहा है कि जोशीमठ की जमीन मुख्य रूप से ढीली संरचना (मोरैन) पर बनी है, जिसमें मिट्टी, पत्थर और मलबा शामिल होता है। इसी वजह से यहां भारी निर्माण और प्राकृतिक दबाव के कारण दरारें और धंसाव बढ़ रहे हैं।
सर्वे एजेंसियां अब अलग-अलग स्थानों पर गहराई तक जांच कर रही हैं, ताकि जमीन की क्षमता और स्थिरता का सही आकलन किया जा सके। इसके आधार पर भविष्य में ढलानों को स्थिर करने और नुकसान कम करने की योजना बनाई जाएगी।



