उत्तराखंड में झरनों, नदियों और गदेरों का व्यापक सर्वे शुरू, जल स्रोतों का तैयार होगा डेटाबेस

देहरादून: उत्तराखंड में प्राकृतिक जल स्रोतों के संरक्षण और वैज्ञानिक प्रबंधन की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य में झरनों, नदियों और गदेरों (छोटे पहाड़ी जलस्रोतों) का व्यापक सर्वे किया जा रहा है, जिसके तहत सभी जल स्रोतों का एक विस्तृत डेटाबेस तैयार किया जाएगा।
जानकारी के अनुसार, इस सर्वे का उद्देश्य राज्य में मौजूद प्राकृतिक जल संसाधनों की पहचान, उनका दस्तावेजीकरण और भविष्य के लिए संरक्षण रणनीति तैयार करना है। इसके जरिए यह भी पता लगाया जाएगा कि कौन से जल स्रोत सूखने की कगार पर हैं या जिनमें जल प्रवाह कम हो रहा है।
अधिकारियों का कहना है कि यह डेटाबेस जल प्रबंधन, आपदा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण योजनाओं में अहम भूमिका निभाएगा। इससे ग्रामीण और पहाड़ी क्षेत्रों में जल संकट की स्थिति को बेहतर तरीके से समझा और नियंत्रित किया जा सकेगा।
विशेषज्ञों के मुताबिक, हिमालयी राज्य होने के कारण उत्तराखंड में जल स्रोतों की संख्या अधिक है, लेकिन जलवायु परिवर्तन और अनियंत्रित विकास के कारण कई प्राकृतिक स्रोत प्रभावित हो रहे हैं। ऐसे में यह सर्वे भविष्य की योजनाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
प्रशासन ने बताया कि सर्वेक्षण कार्य चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है और आने वाले समय में इसका डेटा सार्वजनिक योजनाओं में उपयोग किया जाएगा।



