चमोली में भू-तापीय ऊर्जा परियोजना को लेकर बड़ा कदम, हाई लेवल कमेटी का गठन

उत्तराखंड के चमोली जिले में प्रस्तावित भू-तापीय ऊर्जा (Geothermal Energy) परियोजना को लेकर राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। परियोजना की संभावनाओं, तकनीकी पहलुओं और पर्यावरणीय प्रभावों का अध्ययन करने के लिए एक हाई लेवल कमेटी का गठन किया गया है। इस समिति में विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों और संबंधित विभागों के अधिकारियों को शामिल किया गया है।
सरकार का मानना है कि भू-तापीय ऊर्जा परियोजना राज्य में स्वच्छ और वैकल्पिक ऊर्जा के नए स्रोत के रूप में उभर सकती है। चमोली क्षेत्र में भू-तापीय गतिविधियों की संभावनाओं को देखते हुए लंबे समय से इस दिशा में अध्ययन की मांग की जा रही थी।
अधिकारियों के अनुसार, हाई लेवल कमेटी परियोजना की व्यवहार्यता, पर्यावरणीय सुरक्षा, स्थानीय प्रभाव और तकनीकी आवश्यकताओं का विस्तृत अध्ययन करेगी। इसके बाद सरकार को रिपोर्ट सौंपी जाएगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि भू-तापीय ऊर्जा पर्यावरण के अनुकूल मानी जाती है और इससे पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम हो सकती है। हालांकि, पहाड़ी क्षेत्रों में किसी भी बड़े प्रोजेक्ट को लेकर पर्यावरणीय संतुलन और स्थानीय आबादी पर प्रभाव का आकलन बेहद जरूरी माना जा रहा है।
राज्य सरकार इस परियोजना को उत्तराखंड में हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में देख रही है। यदि परियोजना सफल होती है, तो इससे ऊर्जा उत्पादन के साथ-साथ स्थानीय रोजगार और विकास को भी बढ़ावा मिल सकता है।



