उत्तराखंड

4जी सैचुरेशन योजना पर उठे सवाल, कई गांव आज भी मोबाइल नेटवर्क से वंचित

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केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी 4जी सैचुरेशन योजना के बावजूद उत्तराखंड के कई ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क की समस्या बरकरार है। योजना का उद्देश्य देश के सभी दूरस्थ और नेटवर्क विहीन गांवों तक 4जी सेवाएं पहुंचाना था, लेकिन प्रदेश के अनेक गांवों में अभी भी लोगों को बेहतर मोबाइल कनेक्टिविटी का इंतजार है।

ग्रामीणों का कहना है कि नेटवर्क की कमजोर स्थिति के कारण उन्हें ऑनलाइन शिक्षा, डिजिटल भुगतान, टेलीमेडिसिन और सरकारी सेवाओं का लाभ लेने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई क्षेत्रों में लोगों को फोन कॉल करने या इंटरनेट चलाने के लिए ऊंचे स्थानों पर जाना पड़ता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियां, दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र और टावर स्थापना से जुड़ी तकनीकी चुनौतियां योजना के क्रियान्वयन में बाधा बन रही हैं। हालांकि केंद्र सरकार का दावा है कि 4जी सैचुरेशन परियोजना के तहत देशभर के हजारों गांवों को जोड़ने का कार्य तेजी से चल रहा है और शेष क्षेत्रों में भी नेटवर्क पहुंचाने के प्रयास जारी हैं।

दूरसंचार मंत्रालय के अनुसार, 4जी सैचुरेशन योजना के तहत हजारों मोबाइल टावर स्थापित किए जा चुके हैं और देश के दूरस्थ इलाकों में कनेक्टिविटी बढ़ाने का काम जारी है। सरकार ने हाल ही में कहा था कि सभी गांवों तक 4जी नेटवर्क पहुंचाने की दिशा में तेजी से काम हो रहा है।

प्रदेश के जनप्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों ने सरकार से मांग की है कि जिन गांवों में अब भी मोबाइल नेटवर्क नहीं पहुंचा है, वहां प्राथमिकता के आधार पर टावर स्थापित किए जाएं। उनका कहना है कि डिजिटल युग में संचार सुविधाओं से वंचित रहना ग्रामीण विकास की राह में बड़ी बाधा है।

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