उत्तराखंड: 191 स्कूलों में पीने के पानी का संकट, छह हजार से अधिक छात्रों के पास फर्नीचर नहीं

देहरादून। उत्तराखंड के सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। प्रदेश के 191 स्कूलों में पीने के पानी की सुविधा नहीं है, जबकि छह हजार से अधिक छात्र-छात्राओं के पास बैठने के लिए पर्याप्त फर्नीचर उपलब्ध नहीं है। इसके अलावा 275 स्कूलों में बिजली की सुविधा भी नहीं है।
जानकारी के मुताबिक, पानी की सबसे ज्यादा समस्या पिथौरागढ़ जिले के 89 स्कूलों में है। इसके बाद नैनीताल के 43 स्कूलों में भी छात्र-छात्राओं को पेयजल संकट का सामना करना पड़ रहा है। देहरादून, अल्मोड़ा, चंपावत और पौड़ी समेत अन्य जिलों के कई विद्यालय भी इस समस्या से जूझ रहे हैं।
बिजली और पानी की कमी से पढ़ाई प्रभावित
शिक्षकों के अनुसार, स्कूलों में बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं होने का सीधा असर पढ़ाई पर पड़ रहा है। गर्मी और बरसात के मौसम में छात्रों को सबसे अधिक परेशानी होती है। सुविधाओं के अभाव में उनकी एकाग्रता और सीखने की क्षमता भी प्रभावित होती है।
12 हजार करोड़ से अधिक है शिक्षा विभाग का बजट
प्रदेश में शिक्षा विभाग का बजट 12 हजार करोड़ रुपये से अधिक है। इसके बावजूद कई सरकारी विद्यालयों में पेयजल, बिजली और फर्नीचर जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। कई स्कूल जर्जर भवनों में संचालित हो रहे हैं, जबकि कुछ विद्यालयों के पास अपना भवन तक नहीं है।



