स्वतंत्रता दिवस: राज्यपाल गुरमीत सिंह बोले- भारत की युवा शक्ति किसी बाहरी मॉडल की मोहताज नहीं, 2047 तक विकसित भारत का विजन

देहरादून। देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) ने युवाओं की शक्ति, तकनीकी आत्मनिर्भरता और विकसित भारत के संकल्प को लेकर अपना विजन साझा किया। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में भारत की वास्तविक ताकत उसकी ज्ञान-संपन्न युवा ऊर्जा है। युवा किसी बाहरी सोच या मॉडल पर निर्भर नहीं हैं, बल्कि देश की समृद्ध सभ्यता और आधुनिक तकनीक का संगम उनकी सबसे बड़ी शक्ति है।
राज्यपाल ने कहा कि आज भारत के युवाओं के पास आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग और डेटा साइंस जैसी अत्याधुनिक तकनीकों की शक्ति है। साथ ही उनके भीतर ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना और मातृभूमि की सेवा का संकल्प भी है। उन्होंने कहा कि युवाओं को केवल नौकरी तलाशने वालों तक सीमित रखने के बजाय उन्हें जॉब क्रिएटर, शोधकर्ता और राष्ट्र निर्माता बनने के अवसर देने की जरूरत है।
तकनीकी आत्मनिर्भरता पर जोर
गुरमीत सिंह ने कहा कि भारत तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इंडिया एआई मिशन के तहत देश में व्यापक एआई कंप्यूटिंग क्षमता विकसित की जा रही है। इससे भारतीय स्टार्टअप, शोधकर्ता और नवाचारकर्ता देश में उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल कर भारतीय भाषाओं, कृषि, स्वास्थ्य और स्थानीय जरूरतों के अनुरूप स्वदेशी तकनीकी समाधान तैयार कर सकेंगे।
उन्होंने कहा कि एआई का उद्देश्य केवल सूचना के आदान-प्रदान तक सीमित नहीं होना चाहिए। इसका इस्तेमाल प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने, किसानों को मौसम संबंधी जानकारी देने, सरकारी योजनाओं की निगरानी और आम लोगों तक नागरिक सेवाएं तेजी से पहुंचाने में किया जा सकता है।
शोध और नवाचार से युवाओं को मिलेगा अवसर
राज्यपाल ने अनुसंधान और नवाचार को विकसित भारत की आधारशिला बताते हुए कहा कि देश में शोध को प्रयोगशालाओं और शोध पत्रों तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। नई दवाइयों, आधुनिक कृषि तकनीकों, पेटेंट और स्वदेशी उत्पादों के रूप में शोध का लाभ आम जनता तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने कहा कि अनुसंधान और नवाचार युवाओं के विचारों को सफल स्टार्टअप और वास्तविक उत्पादों में बदलने का माध्यम बन सकते हैं।
उत्तराखंड विकास में निभा रहा अहम भूमिका
राज्यपाल ने कहा कि ‘विकसित भारत @2047’ के संकल्प को पूरा करने में उत्तराखंड महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने राज्य की युवा शक्ति और मातृशक्ति को प्रदेश की सबसे बड़ी ताकत बताया। एआई, एग्रोटेक, ग्रीन एनर्जी और बायोटेक जैसे क्षेत्रों में उत्तराखंड के स्टार्टअप नए अवसर पैदा कर रहे हैं।
उन्होंने चारधाम ऑल-वेदर रोड, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना और हवाई व डिजिटल कनेक्टिविटी के विस्तार को प्रदेश की विकास यात्रा में महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार पर्यटन अब धार्मिक यात्रा तक सीमित नहीं है, बल्कि शीतकालीन और साहसिक पर्यटन के साथ नई संभावनाएं भी विकसित हो रही हैं।
सीमांत गांवों के विकास पर भी जोर
राज्यपाल ने सीमांत क्षेत्रों के विकास को राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जोड़कर देखा। उन्होंने कहा कि सड़क, संचार और पर्यटन सुविधाओं के विस्तार तथा स्थानीय उत्पादों को बाजार से जोड़ने से सीमांत गांवों में आजीविका के नए अवसर बन रहे हैं। ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम’ ने इन क्षेत्रों को देश के अंतिम गांव के बजाय प्रथम गांव के रूप में देखने की नई सोच दी है।
उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता का वास्तविक अर्थ तभी पूरा होगा, जब नागरिक अपने अधिकारों के साथ राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों को भी समझें। भारत आर्थिक और तकनीकी शक्ति बनने के साथ अपनी प्राचीन ज्ञान परंपरा, योग, आयुर्वेद और संस्कृत के आधुनिक पुनरुत्थान के माध्यम से विश्व में अपनी अलग पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।



