दिल्ली: जंतर-मंतर पर FRS के इस्तेमाल को लेकर सुप्रीम कोर्ट में पुलिस ने दी सफाई, कहा- अपराधियों की पहचान के लिए किया इस्तेमाल

नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान फेस रिकग्निशन सिस्टम (FRS) के इस्तेमाल को लेकर दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखा है। पुलिस ने कहा कि इस तकनीक का इस्तेमाल प्रदर्शनकारियों की जासूसी या उनकी निगरानी के लिए नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने और आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों की पहचान करने के लिए किया गया।
दिल्ली पुलिस के मुताबिक, जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में लोगों के जुटने के कारण सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए FRS तकनीक का इस्तेमाल किया गया। पुलिस का दावा है कि सिस्टम के जरिए ऐसे संदिग्ध या वांछित अपराधियों की पहचान की जाती है, जिनका रिकॉर्ड पहले से पुलिस के डेटाबेस में मौजूद है।
पुलिस ने बताया कि FRS से लैस वाहनों और कैमरों के जरिए भीड़ की रियल टाइम निगरानी की जाती है। यदि किसी व्यक्ति का चेहरा पुलिस के रिकॉर्ड में मौजूद किसी संदिग्ध या वांछित आरोपी से मेल खाता है तो संबंधित पुलिस टीम को अलर्ट मिलता है।
2.5 लाख से अधिक संदिग्धों का डेटाबेस
पुलिस के अनुसार, उसके डेटाबेस में दो लाख से अधिक संदिग्ध अपराधियों की जानकारी मौजूद है। FRS सिस्टम इन्हीं रिकॉर्ड से चेहरों का मिलान करता है। पुलिस का कहना है कि इसका उद्देश्य आम प्रदर्शनकारियों की निजी जानकारी जुटाना नहीं है।
दिल्ली पुलिस ने यह भी कहा कि बड़े सार्वजनिक आयोजनों के दौरान FRS का इस्तेमाल कोई नई व्यवस्था नहीं है। गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस और प्रमुख त्योहारों के दौरान भी सुरक्षा व्यवस्था के तहत इस तकनीक का इस्तेमाल किया जाता रहा है।
जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन के बीच बढ़ा विवाद
जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन के दौरान FRS कैमरों की तैनाती को लेकर सवाल उठे थे। प्रदर्शनकारियों और कुछ संगठनों ने इसे निजता और निगरानी से जुड़ा मुद्दा बताया था। इसके बाद पुलिस ने स्पष्ट किया कि तकनीक का इस्तेमाल केवल सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के उद्देश्य से किया जा रहा है।
पुलिस के मुताबिक, बड़े जमावड़े में असामाजिक तत्वों या आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों की मौजूदगी से कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है। ऐसे में FRS को एक निवारक और जांच संबंधी उपकरण के तौर पर इस्तेमाल किया गया।
पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अपने पक्ष में कहा कि जंतर-मंतर पर FRS की तैनाती का उद्देश्य प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाना नहीं, बल्कि किसी संभावित आपराधिक गतिविधि को रोकना और सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करना है।



