उत्तराखंड: धामी कैबिनेट ने राज्य सहकारी नीति-2026 को दी मंजूरी, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा

देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में उत्तराखंड राज्य सहकारी नीति-2026 को मंजूरी दे दी गई। राष्ट्रीय सहकारी नीति के अनुरूप तैयार की गई इस नीति का उद्देश्य प्रदेश में सहकारी संस्थाओं को मजबूत करने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देना और रोजगार के नए अवसर पैदा करना है।
नई नीति के तहत सहकारी संस्थाओं को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह, तकनीक आधारित और आर्थिक रूप से सक्षम बनाने पर जोर दिया गया है। कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों में मूल्य श्रृंखला विकसित करने के साथ महिला एवं युवा सशक्तीकरण, रोजगार सृजन, वित्तीय समावेशन और पलायन की समस्या से निपटने को भी प्राथमिकता दी जाएगी।
सात प्रमुख मिशन पर रहेगा फोकस
सहकारिता क्षेत्र के समग्र विकास के लिए नीति में सात प्रमुख रणनीतिक मिशन निर्धारित किए गए हैं। इनके माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में सहकारी संस्थाओं की भूमिका बढ़ाने, किसानों और उत्पादकों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने तथा स्थानीय स्तर पर आय के नए साधन विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।
सरकार का मानना है कि मजबूत सहकारी व्यवस्था से गांवों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ पलायन को रोकने में भी मदद मिल सकती है।
महिला और युवाओं के सशक्तीकरण पर जोर
नीति में महिलाओं और युवाओं को सहकारी गतिविधियों से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने पर विशेष ध्यान दिया गया है। कृषि, बागवानी और अन्य स्थानीय उत्पादों के उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन को बेहतर बनाने की दिशा में भी काम किया जाएगा।
राज्य सरकार के अनुसार, सहकारिता के माध्यम से स्थानीय संसाधनों और उत्पादों को बाजार से जोड़कर ग्रामीण क्षेत्रों में आय और रोजगार के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं।
कैबिनेट के इस फैसले को उत्तराखंड के गांवों की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और सहकारी क्षेत्र को आधुनिक स्वरूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।



