उत्तराखंड: 7000 से अधिक UPNL कर्मचारियों का भविष्य सुरक्षित, धामी कैबिनेट ने दी मंजूरी

देहरादून: उत्तराखंड में उपनल (UPNL) के माध्यम से विभिन्न विभागों में कार्यरत सात हजार से अधिक कर्मचारियों के लिए धामी कैबिनेट ने बड़ा फैसला लिया है। कैबिनेट ने कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित करने और समान काम के लिए समान वेतन का लाभ देने से जुड़े प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
नई व्यवस्था के तहत बिना स्वीकृत पदों के बावजूद विभिन्न विभागों में कार्यरत सात हजार से अधिक उपनल कर्मचारियों को नियुक्ति की तिथि से नियोजित माना जाएगा। वहीं, सेवा में व्यवधान होने की स्थिति में भी पात्र कर्मचारियों को समान काम के लिए समान वेतन का लाभ मिलेगा।
तीन चरणों में मिलेगा समान वेतन का लाभ
कैबिनेट के फैसले के अनुसार समान काम के लिए समान वेतन का लाभ तीन चरणों में दिया जाएगा। पहले चरण में एक जनवरी 2016 से पहले नियुक्त कर्मचारियों को शामिल किया जाएगा। दूसरे चरण में एक जनवरी 2016 से 12 नवंबर 2018 के बीच नियोजित कर्मचारियों के वेतनमान पर विचार होगा। इन दोनों चरणों पर कार्रवाई 9 नवंबर 2026 से शुरू होगी।
तीसरे चरण में 13 नवंबर 2018 से 15 अक्तूबर 2024 तक नियोजित कर्मचारियों को समान काम के लिए समान वेतन देने की प्रक्रिया 1 अप्रैल 2027 से शुरू होगी।
निरंतर सेवा की शर्त हटाई गई
सरकार ने सैनिक कल्याण विभाग के 20 फरवरी 2026 के शासनादेश में शामिल निरंतर नियोजित रहने की शर्त को भी हटा दिया है। इससे एक जनवरी 2016 से पहले कार्यरत और वर्तमान में सेवा दे रहे उपनल कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन और महंगाई भत्ते का लाभ मिल सकेगा।
यदि किसी विभाग में स्वीकृत पदों के मुकाबले अधिक उपनल कर्मचारी कार्यरत हैं, तो उन्हें नियुक्ति की तिथि से स्वीकृत पदों के सापेक्ष नियोजित माना जाएगा। पद उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में अधिसंख्य पदों के सृजन और समायोजन की व्यवस्था भी की जाएगी। इसके लिए एक अलग व्यवस्था समिति गठित की जाएगी।
कैबिनेट के इस फैसले को लंबे समय से समान वेतन और नौकरी की सुरक्षा की मांग कर रहे उपनल कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण राहत के तौर पर देखा जा रहा है।



