उत्तराखंड

केदारनाथ यात्रा मार्ग पर बढ़ा खतरा: हिमस्खलन के लिहाज से बेहद संवेदनशील है लिनचोली क्षेत्र, वैकल्पिक मार्ग बनाने की सिफारिश

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देहरादून। केदारनाथ यात्रा मार्ग पर स्थित लिनचोली क्षेत्र को हिमस्खलन (एवलांच) के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना गया है। विशेषज्ञों ने यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए इस इलाके के लिए वैकल्पिक मार्ग विकसित करने की सिफारिश की है। हाल ही में किए गए अध्ययन में चेतावनी दी गई है कि भारी बर्फबारी और बदलते मौसम के दौरान यह क्षेत्र यात्रियों के लिए जोखिम भरा साबित हो सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार गौरीकुंड से केदारनाथ तक जाने वाले 16 किलोमीटर लंबे पैदल मार्ग में लिनचोली एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, लेकिन यहां हिमस्खलन की घटनाओं की आशंका अधिक रहती है। यही वजह है कि वैज्ञानिकों और आपदा विशेषज्ञों ने प्रशासन को सुरक्षित वैकल्पिक ट्रैक तैयार करने की सलाह दी है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि केदारनाथ यात्रा के दौरान हर साल लाखों श्रद्धालु इस मार्ग से गुजरते हैं। ऐसे में यदि मौसम खराब होता है या अचानक बर्फबारी होती है तो लिनचोली क्षेत्र में बड़ा खतरा पैदा हो सकता है। विशेषज्ञों ने संवेदनशील क्षेत्रों की नियमित मॉनिटरिंग और आधुनिक चेतावनी प्रणाली विकसित करने पर भी जोर दिया है।

बताया गया है कि वर्ष 2013 की आपदा के बाद केदारनाथ यात्रा मार्ग में कई बदलाव किए गए थे और वर्तमान ट्रैक को भी समय-समय पर मजबूत किया जाता रहा है। इसके बावजूद वैज्ञानिकों का मानना है कि भविष्य में यात्रियों की संख्या और मौसमीय जोखिम को देखते हुए अतिरिक्त सुरक्षित मार्ग तैयार करना जरूरी होगा।

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