उत्तराखंड के सेब पर मौसम की मार: काला पड़ रही फसल, हिमाचल के मुकाबले आधे दाम; मंडी में 70 फीसदी घटी आवक

उत्तराखंड में इस बार मौसम की मार का असर सेब की पैदावार के साथ उसकी गुणवत्ता पर भी पड़ा है। त्यूणी और उत्तरकाशी के मोरी क्षेत्र से मंडियों में पहुंच रहे अधिकांश सेब के काला पड़ने की समस्या सामने आ रही है। खराब गुणवत्ता के कारण स्थानीय सेब को थोक बाजार में हिमाचल के अच्छे सेब के मुकाबले लगभग आधे दाम मिल रहे हैं।
मंडी में स्थानीय सेब की आवक पिछले वर्ष की तुलना में करीब 70 फीसदी तक कम हो गई है। वर्तमान में उत्तराखंड के सेब का थोक भाव करीब 60 से 70 रुपये प्रति किलो है, जबकि हिमाचल के अच्छी गुणवत्ता वाले सेब को 120 से 130 रुपये प्रति किलो तक भाव मिल रहा है। कारोबारियों के अनुसार, स्थानीय सेब के दाम गिरने की प्रमुख वजह फसल की खराब गुणवत्ता है।
करीब दो सप्ताह पहले मंडी में सेब की आवक शुरू हुई थी। शुरुआत में स्थानीय सेब 80 से 90 रुपये प्रति किलो तक बिका, लेकिन खराब गुणवत्ता वाली फसल आने के बाद कीमतों में गिरावट आ गई। पिछले वर्ष इस समय मंडी में रोजाना करीब 10 हजार पेटी सेब पहुंचता था, जबकि इस बार यह संख्या घटकर करीब 2500 से 3000 पेटी रह गई है।
उत्तरकाशी में उत्पादन में भारी गिरावट
मौसम में लगातार बदलाव का सबसे ज्यादा असर उत्तरकाशी के सेब उत्पादन पर पड़ा है। जिले के प्रमुख सेब उत्पादक क्षेत्र मोरी में इस साल उत्पादन करीब 16 हजार मीट्रिक टन से घटकर महज तीन से साढ़े तीन हजार मीट्रिक टन रहने का अनुमान है। पुरोला और नौगांव में भी सामान्य उत्पादन का केवल 10 से 20 प्रतिशत ही सेब हो पाया है।
बागवानों के मुताबिक मार्च-अप्रैल में फूल आने के दौरान बारिश से फल सेट नहीं हो पाया। इसके बाद हुई ओलावृष्टि ने बची हुई फसल को भी नुकसान पहुंचाया। कई बागवान, जो सामान्य तौर पर सैकड़ों पेटी सेब का उत्पादन करते थे, इस बार बेहद कम उत्पादन तक सीमित रह गए हैं।
ज्योतिर्मठ में भी आधा रह गया उत्पादन
ज्योतिर्मठ क्षेत्र में भी इस वर्ष अत्यधिक ओलावृष्टि के कारण सेब उत्पादन करीब आधा रह गया है। पिछले साल जहां क्षेत्र में करीब 300 मीट्रिक टन सेब का उत्पादन हुआ था, वहीं इस बार यह घटकर करीब 150 मीट्रिक टन रह गया। पेड़ों पर बचे सेब भी दागदार हैं, जिससे किसानों को उत्पादन घटने के साथ कम कीमत की दोहरी मार झेलनी पड़ रही है।
इस बीच मंडी में कश्मीरी सेब की आवक भी शुरू हो गई है। अच्छी गुणवत्ता के कारण इसके शुरुआती भाव करीब 130 रुपये प्रति किलो तक हैं। आने वाले दिनों में कश्मीर के साथ चमोली और उत्तरकाशी के अन्य क्षेत्रों से भी सेब की आवक बढ़ने की उम्मीद है।



