सत्य निकेतन हादसे के बाद DU छात्रों का प्रदर्शन: सुरक्षित और सस्ते आवास की मांग, PG के सेफ्टी ऑडिट की उठी आवाज

नई दिल्ली: दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला छात्रावास जैसी इमारत के ढहने की घटना के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) के छात्रों में सुरक्षा को लेकर आक्रोश बढ़ गया है। छात्रों ने प्रदर्शन कर सुरक्षित और किफायती आवास की व्यवस्था करने, निजी पीजी की सुरक्षा जांच कराने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
हादसे के बाद PG छोड़ रहे छात्र
सत्य निकेतन हादसे के बाद आसपास के कई पीजी और किराये के मकानों में रहने वाले छात्र अपना सामान लेकर दूसरी जगह जाने लगे हैं। कई छात्रों के अभिभावक भी उन्हें वापस घर बुला रहे हैं। छात्रों का कहना है कि हादसे के बाद इलाके में रहने को लेकर डर का माहौल है।
छात्रों के मुताबिक, कई पीजी में सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। कुछ जगहों पर सुरक्षा गार्ड नहीं हैं, जबकि कई इमारतों में रखरखाव और आपातकालीन निकासी की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं।
सुरक्षित और कम बजट वाले आवास की मांग
प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अधिक हॉस्टल उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका कहना है कि बाहर से पढ़ने के लिए दिल्ली आने वाले विद्यार्थियों के पास निजी पीजी में रहने के अलावा सीमित विकल्प हैं। ऐसे में महंगे किराये के बावजूद उन्हें कई बार पर्याप्त सुविधाएं और सुरक्षा नहीं मिल पाती।
छात्रों ने विश्वविद्यालय और प्रशासन से ऐसे आवास की व्यवस्था करने की मांग की है, जो सुरक्षित होने के साथ-साथ विद्यार्थियों के बजट में भी हो।
DU में हॉस्टल की कमी बड़ी चुनौती
सत्य निकेतन हादसे ने दिल्ली विश्वविद्यालय में छात्रावासों की कमी के मुद्दे को भी सामने ला दिया है। रिपोर्टों के अनुसार, DU में छात्रों की संख्या के मुकाबले हॉस्टल की क्षमता काफी सीमित है। दक्षिणी परिसर के कई कॉलेजों के छात्रों को निजी पीजी और किराये के मकानों पर निर्भर रहना पड़ता है।
छात्रों का कहना है कि हॉस्टल की कमी के कारण वे ऐसे इलाकों में रहने को मजबूर हैं, जहां भवनों की सुरक्षा और रखरखाव को लेकर पर्याप्त निगरानी नहीं होती।
PG और छात्र आवासों के सेफ्टी ऑडिट की मांग
छात्र संगठनों ने निजी पीजी और छात्र आवासों का व्यापक सेफ्टी ऑडिट कराने की मांग की है। वहीं, इस हादसे के बाद दिल्ली में छात्र आवासों समेत सार्वजनिक उपयोग वाली इमारतों के अनिवार्य स्ट्रक्चरल ऑडिट और सुरक्षा प्रमाणन की बात भी सामने आई है।
छात्रों का कहना है कि केवल हादसे के बाद कार्रवाई करने के बजाय प्रशासन को पहले से ही इमारतों की सुरक्षा जांच सुनिश्चित करनी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।



