
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना के तहत चमोली जिले में सिवई के पास सेना के उपयोग के लिए तीन सुरंगों का निर्माण किया जा रहा है। इन सुरंगों का करीब 60 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। परियोजना को सामरिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इन सुरंगों के निर्माण का उद्देश्य सेना की आवाजाही के लिए वैकल्पिक और सुरक्षित कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना है। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना का अधिकांश हिस्सा सुरंगों के जरिए तैयार किया जा रहा है। परियोजना में मुख्य सुरंगों के साथ आपातकालीन निकासी सुरंगों का भी निर्माण किया जा रहा है।
125 किलोमीटर लंबी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन देहरादून, टिहरी गढ़वाल, पौड़ी गढ़वाल, रुद्रप्रयाग और चमोली जिलों से होकर गुजरेगी। इस परियोजना से देवप्रयाग और कर्णप्रयाग जैसे धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों को ऋषिकेश और देश के अन्य हिस्सों से रेल कनेक्टिविटी मिलेगी।
परियोजना में कुल 16 मुख्य सुरंगों और 12 एस्केप सुरंगों का प्रावधान है। रेलवे लाइन का बड़ा हिस्सा सुरंगों के अंदर से होकर गुजरेगा, जिसके चलते सुरक्षा और आपातकालीन निकासी के लिए अलग सुरंगों का निर्माण किया जा रहा है।



