
नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी ने भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। वित्त मंत्रालय ने अपनी सितंबर 2026 की मासिक आर्थिक समीक्षा में महंगे कच्चे तेल, वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता और सख्त होती वित्तीय परिस्थितियों को अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम बताया है।
पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त 2026 में भारतीय कच्चे तेल की बास्केट की औसत कीमत 90.19 डॉलर प्रति बैरल थी, जो सितंबर में बढ़कर 116.04 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई। इस तरह एक महीने में कीमत में करीब 28.66 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से देश का आयात बिल बढ़ सकता है। इसका असर परिवहन, लॉजिस्टिक्स और विनिर्माण की लागत पर भी पड़ सकता है। इससे घरेलू बाजार में महंगाई का दबाव बढ़ने की आशंका है।
वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था में वृद्धि की रफ्तार बनी हुई है। वित्त मंत्रालय के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में वास्तविक जीडीपी में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। हालांकि, मंत्रालय ने आगाह किया है कि महंगा कच्चा तेल, वैश्विक व्यापार को लेकर अनिश्चितता और विदेशी पूंजी के प्रवाह में उतार-चढ़ाव आगे आर्थिक वृद्धि और रुपये पर दबाव डाल सकते हैं।
वित्त मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले समय में वैश्विक परिस्थितियों पर नजर रखना और महंगाई के जोखिमों को नियंत्रित करना आर्थिक नीति के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।



